मंडी शुल्क में की गई कटौती, अब प्रति 100 रुपये पर देना होगा 50 पैसे का मंडी शुल्क

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मंडी शुल्क में कटौती

किसानों के द्वारा उत्पादित फसल, सब्जी, फल–फूल तथा अन्य प्रकार के उत्पाद को बेचने के लिए सभी राज्यों में मण्डी शुल्क लिया जाता है | मंडी शुल्क से होने वाली आय के बदले में वहां विभिन्न व्यवस्थाएं जैसे पानी शौचालय, रुकने की व्यवस्था, गाड़ी पार्किंग की व्यवस्था शासन की तरफ से ही की जाती है |  मंडी में किसानों के लिए एक अच्छे बाजार के साथ ही अन्य प्रकार की सुविधा भी दी जाती है | यह शुल्क अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होता है | अभी हाल ही में उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा मंडी शुल्क मंडी शुल्क की दर को 2% से घटाकर 1% कर दिया है | इसके आलावा अब  मध्यप्रदेश सरकार ने भी  मंडी शुल्क में भारी कटौती की है जिसका लाभ सीधे व्यापारी एवं किसानों को मिलेगा |

मध्यप्रदेश में मंडी शुल्क 1.50 रुपये से घटाकर किया गया 50 पैसे

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्य प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में व्यापारियों से लिए जाने वाले मंडी शुल्क की राशि अब 1.50 रु. के स्थान पर 50 पैसे प्रति 100 रु. होगी। यह छूट 14 नवंबर 2020 से आगामी 3 माह के लिए रहेगी। मध्य प्रदेश सरकार ने गत दिनों व्यापारियों से इस संबंध में किए गए वादे को पूरा कर दिया है। व्यापारियों द्वारा मुख्यमंत्री श्री चौहान को आश्वस्त किया गया था कि इससे मंडियों की आय में कमी नहीं होगी। 3 महीने बाद इस छूट के परिणामों का अध्ययन कर आगे के लिए निर्णय लिया जाएगा।

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आगे भी लागू रह सकती है छूट

व्यापारियों के आश्वासन पर मंडी शुल्क में छूट दी गई है। छूट की अवधि में यदि मंडियों को प्राप्त आय से मंडियों के संचालन, उनके रखरखाव एवं कर्मचारियों के वेतन भत्तों की व्यवस्था सुनिश्चित करने में कठिनाई नहीं होती है, तो राज्य शासन द्वारा इस छूट को आगे भी जारी रखा जा सकता है।

पिछले वर्ष मंदी शुल्क से हुई थी 1200 करोड़ रुपये की आय

वर्ष 2019-20 में प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों को मंडी फीस एवं अन्य स्रोतों से कुल 12 सौ करोड रुपए की आय हुई थी। मंडी बोर्ड में लगभग 4200 तथा मंडी समिति सेवा में लगभग 29 सौ अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं तथा लगभग 2970 सेवानिवृत्त अधिकारी- कर्मचारी हैं। इनके वेतन भत्तों पर गत वर्ष 677 करोड रुपए का व्यय हुआ था।

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