रबी लहसुन के रोपण हेतु खेत की तैयारी से पुर्व जरुर जानें यह खास बातें

रबी लहसुन के रोपण हेतु खेत की तैयारी से पुर्व जरुर जानें यह खास बातें

    निम्नलिखित सिफारिश की गई विधियों के अनुसार खेत की तैयारी करें।

  1. खेत में हल से जुताई करनी चाहिए ताकि पिछली फसल के बचे अवशेष हट जाएं और ढेले टूटकर मिट्टी भूरभूरी हो जाए।
  2. सड़ी हुई गोबर खाद 15 ट./हे. या मुर्गी खाद 7.5 ट./हे. या केंचूए की खाद 7.5 ट./हे. आखिरी जुताई के समय डालनी चाहिए तथा क्यारियां बनाने से पहले खेत को समान ठीक तरह से समतल करना चाहिए।
  3. रासायनिक उर्वरक नत्रजन : फॉस्फोरस : पोटाश : गंधक को 75 : 40 : 40 : 40 कि. ग्रा. प्रति हेक्टेयर देने की जरूरत है। नत्रजन 25 कि. ग्रा. तथा फॉस्फोरस, पोटाश एवं गंधक की पूरी मात्रारोपण के समय देनी चाहिए। नत्रजन की उर्वरित मात्रा दो समान भागों में रोपाई के 30 एवं 45दिनों के बाद देनी चाहिए।
  4. यदि लहसुन के लिए टपक सिंचाई का प्रयोग किया गया है। तब 25 कि. ग्रा. नत्रजन रोपण के समय आधारिय मात्रा के रूप में और उर्वरित नत्रजन का इस्तेमाल छह भागों में रोपण के 60दिनों बाद तक 10 दिनों के अंतराल पर टपक सिंचाई के माध्यम से किया जाना चाहिए। फॉस्फोरस, पोटाश और गंधक का इस्तेमाल आधारिय रूप में रोपण के समय किया जाना चाहिए।
  5. जैविक उर्वरक ऐजोस्पाइरिलियम और फॉस्फोरस घोलनेवाले जीवाणु, दोनों की 5 कि. ग्रा. / हे.की दर से आधा‍रिय मात्रा के रूप में अकार्बनिक उर्वरकों के साथ डालने की सिफारिश की गई है।
  6. खरपतवार नियंत्रण के लिए ऑक्सिफ्लोरोफेन 23.5% ईसी (1.5-2 मि.ली./लिटर) या पेंडीमिथालीन 30% ईसी (3.5-4 मि.ली/लिटर) का इस्तेमाल रोपाई से पहले या रोपाई के समय करना चाहिए।
  7. रोपण के लिए लगभग 1.5 ग्रा. की बड़ी कलियों का चयन करना चाहिए। छोटी, रोग से ग्रसित एवं क्षतिग्रस्त कलियों को रोपण के लिए  नहीं चुनना चाहिए।
  8. फफूंदी रोगों के प्रकोप को कम करने के लिए कलियों को कार्बेन्डाज़िम के घोल (0.1%) में दो घंटेउपचारित करना चाहिए।
  9. कलियों को सीधे रखकर मृदा के 2 से.मी. नीचे रोपित करना चाहिए तथा पौधों के बीच 10से.मी. और पंक्तियों के बीच 15 से.मी अंतर रखना चाहिए। लहसुन के लिए बीज का दर 400-500 कि.ग्रा./हे. होना चाहिए।
  10. चौड़ी उठी हुई क्यारियां जिनकी ऊंचाई 15 से.मी. और चौड़ाई 120 से.मी. हो और नाली 45से.मी. हो, तैयार करनी चाहिए। यह तकनीक टपक और फव्वारा सिंचाई के लिए उपयुक्त है।
  11. टपक सिंचाई के लिए हर चौड़ी उठी हुई क्यारी में 60 से.मी. की दूरी पर दो टपक लेटरल नालियां(16 मि.मी. आकार) अंतर्निहीत उत्सर्जकों के साथ होनी चाहिए। दो अंतर्निहीत उत्सर्जकों के बीचकी दूरी 30-50 सें.मी. और प्रवाह की दर 4 लिटर / घंटा होनी चाहिए।

12.    फव्वारा सिंचाई के लिए दो लेटरल (20 मि.मी.) के बीच की दूरी 6 मी. और निर्वहन दर 135लिटर / घंटा होनी चाहीए

यह भी पढ़ें: लहसुन का खेती करें एवं  1.5 से 2 लाख तक का मुनाफा कमायें 

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