पौध फसलों के अधिक उत्पादन के लिए तैयारी इस तरह करें

0
463
views

पौध फसलों के अधिक उत्पादन के लिए तैयारी इस तरह करें

किसी भी फसल का उत्पादन इस बात पर निर्भर करती है की उस फसल के पौधों की गुणवता कैसी है | कभी – कभी यह होता है की अच्छा बीज होने के बाबजूद भी बीज का अंकुरण नहीं होती है या बहुत ही कम होती है | अक्सर यह देखा गया है की पौधों का अंकुरण तो अच्छा हुआ है लेकिन कुछ दिनों के बाद ही वह बीमारी से ग्रसित हो गया है तथा पौधों का वृद्धि रुक गई है |

यह सब इस बात पर निर्भर करता है की पौधों की नर्सरी तैयार करने के लिए मिट्टी का चुनाव , मौसम , बीज का उपचार, पौधों के लिए खाद या उर्वरक का चुनाव , सिंचाई इत्यादी | इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुये किसान समाधान ने सब्जी की खेती के लिए पौधों की तैयार की पूरी जानकारी लेकर आया है | जिसे आप सभी किसान भाई अपनाकर अपनी पैदावार को बढ़ा सकते हैं |

पौधों को उगाने के लिए मिटटी की तैयारी

पौध उगाने के लिए कार्बनिक खाद जैसे कम्पोस्ट खाद, गोबर की सडी खाद व केंचुए की खाद उपयुक्त होती हैं | इनमें पौधों के लिए आवश्यक लगभग सभी तत्व पाये जाते हैं तथा पौधों के उचित विकास में सहायक होते हैं | इनके प्रयोग से मृदा के भौतिक संरचना सुधरती है और जलधारण करने की क्षमता बढती है | यह ध्यान रखना चाहिए की यह सभी खादें अच्छी प्रकार से सड़ी हुई होनी चाहिए | पौधशाला में प्रयोग की जा रही खाद को महीन करके छान लें तथा छनी हुई खाद पौध उगाने के लिये प्रयोग करें |

यह भी पढ़ें   मध्यप्रदेश में सिंचाई उपकरणों पर अनुदान के लिए चल रही योजनाएं

क्यारी (बीजशैया) की तैयारी हेतु प्रति वर्ग मीटर की दर से 2 कि.ग्रा. सड़ी हुई गोबर की खाद या 500 ग्राम केंचुए की खाद डाल कर मिट्टी में अच्छी प्रकार मिला दें | इससे बीज के जमाव में सुगमता होती है | मिटटी में मौजूद हानिकारक रोगाणुओं व कीटाणुओं आदि को नष्ट करने हेतु भूमि शोधन अत्यन्त आवश्यक है, अन्यथा मिट्टी में पहले से उपस्थित ये हानिकारक जीव पौधों को क्षति पहुंचाते हैं जो न केवल नर्सरी पौध तक ही सीमित रहते हैं बल्कि खेत में रोपण के पश्चात् भी पौधों को हानि कर सकते हैं | भूमि शोधन मृदा सौर्यीकरण विधि, जैविक विधि या फिर रासायनिक विधि से किया जा सकता हैं |

मृदा सौर्यीकरण

सौर्यीकरण अत्यन्त सरल प्रक्रिया है | गर्मियों में गहरी जुताई कर तेज धूप से हानिकारक जीवों को नष्ट किया जा सकता है अथवा पानी से तर किए हुये खेत को 30 माइक्रोन की पारदर्शी पालिथीन से 3 – 4 सप्ताह तक ढंककर या फिर फोर्मलीन के 2 प्रतिशत घोल से तर करने के पश्चात् पालीथीन से 2 – 3 सप्ताह तक ढँक करके, कर सकते हैं |

यह भी पढ़ें   बहुउपयोगी सफेद सिरस की कृषि वानिकी

मृदा का रासायनिक उपचार 

चाहे भूमि शोधन किया गया हो या नहीं, बुवाई से पूर्व पौधशाला की क्यारी की मिटटी को फफूंदनाशी जैसे ट्राइकोडर्मा की 1 कि.ग्रा. मात्रा 25 कि.ग्रा. गोबर की खाद के साथ 4 – 5 दिन गिले जुट की बोरी से ढकने के बाद मिटटी में छिड़क कर मिलाना चाहिए अथवा कैप्टान या थाइराम (5 ग्राम / वर्ग मी.) रसायन से उपचारित करना चाहिए | नर्सरी में कीटों के प्रकोप से बचाव हेतु कार्बोफ्यूरान या क्लोरपाइरीफास (5 ग्राम / वर्ग मी.) को क्यारी की तैयारी करते समय मिटटी में अच्छी प्रकार से मिला देना चाहिए |

नोट :- सब्जी की बीज तथा कीटनाशक सरकारी दर पर तथा घर बैठे IFFCO से आनलाइन मंगा सकते हैं | जो आप को 7 दिन के अन्दर आप के घर पर पहुंचा देगा |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here