दुग्ध उत्पादन को लाभदायक बनाने के लिए भारत सरकार ने शुरू की नई योजना

 राष्ट्रीय बोवाईन उत्पादकता मिशन :-किसानों के लिए दुग्‍ध उत्‍पादन को और भी लाभदायक बनाने के लिए भारत सरकार ने एक नई योजना राष्ट्रीय बोवाईन उत्पादकता मिशन को 825 करोड़ रुपए के आबंटन के साथ अनुमोदित किया है

विश्व दुग्ध दिवस पर आयोजित समारोह

भारत 15 वर्षों से दुग्‍ध उत्‍पादन के क्षेत्र में विश्‍व अग्रणी हैं और यह सफलता छोटे डेयरी किसानों, दुग्‍ध उत्‍पादकों, प्रसंस्‍करणकर्ताओं, नियोजकों, संस्‍थानों तथा अन्‍य सभी पणधारियों के कारण है। उन्होंने आगे कहा कि दूध उत्पादन में हम लगातार प्रगति कर रहे हैं लेकिन अभी भी मीलों  का सफर तय करना है ताकि हम देश के हर बच्‍चे को दूध सहित पर्याप्‍त पोषण दे सकें।  कृषि मंत्री ने यह बात आज पूसा, नई दिल्ली में विश्व दुग्ध दिवस पर आयोजित समारोह में कही।

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कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में 2011-14 में 398 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ था लेकिन 2014-17 में यह 465.5 मिलियन टन हो गया जो कि 16.9% की वृद्धि है। इसी तरह 2011-14 में किसानों की आमदनी रु. 29 प्रति लीटर थी जो 2014-17 में  रु. 33 प्रति लीटर हो गयी जो कि 13.79% की वृद्धि है।

आंध्र प्रदेश का राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र लगभग तैयार है।   कृषि मंत्री ने देशी नस्लों के बारे में बताया कि उष्‍मा–साध्‍य तथा रोग प्रतिरोधी होने के अलावा गायों की देशी नस्‍लें ए 2 टाइप का दूध उत्‍पादित करने के लिए जानी जाती हैं जो विभिन्‍न पुरानी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं, जैसे ह्दय तथा रक्‍त वाहिकाओं संबंधी मधुमेह तथा स्‍नायु संबंधी विकारों से बचाने के अलावा कई अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी लाभ प्रदान करता है। उन्होंने कहा देश में ए 2 ए 2 दूध को अलग से बेचे जाने की आवश्‍यकता है।

राष्‍ट्रीय गौकुल मिशन

गोपशुओं की उत्‍पादकता को बढ़ाने के लिए देशी नस्‍लों के विकास और संरक्षण हेतु आबंटन को कई गुना बढ़ाया गया है। देश में पहली बार “राष्‍ट्रीय गौकुल मिशन” नामक एक नई पहल की गई। इसका उद्देश्‍य देशी बोवाईन नस्‍लों का संरक्षण तथा विकास करना है। इस मिशन के अंतर्गत मुख्यतः गोकुल ग्रामो की स्थापना करना, फील्ड परफॉरमेंस रिकॉर्डिंग करना, गोपालको एवं गौपालन से संबंधित संस्थानों को प्रति वर्ष सम्मानित करना, बुलमदर फर्म्स को सुदृढ़ करना, देसी नस्ल के उच्च अनुवांशिक गुणवता के साँड़ को वीर्य उत्पादन केन्द्रों में अधिक संख्या में शामिल करना इत्यादि है ।

देशी नस्‍लों का समग्र और वैज्ञानिक रूप से विकसित तथा संरक्षित करने के लिए उत्‍कृष्‍टता केंद्र के रूप में कार्य करने हेतु दो “राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्रों” की स्‍थापना की जा रही है। राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र देशी जर्मप्‍लाज्‍म का भण्‍डार होने के अलावा देश में प्रमाणित जेनेटिक्‍स के स्रोत भी होंगे। मध्‍य प्रदेश तथा आंध्र प्रदेश दोनों राज्‍यों को क्रमश: उत्‍तरी और दक्षिणी क्षेत्रों में एक-एक राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र की स्‍थापना हेतु 25- 25 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है।

दूध की लगातार बढ़ती मांग पूरा करने तथा किसानों के लिए दुग्‍ध उत्‍पादन को और भी लाभदायक बनाने के लिए भारत सरकार ने एक नई योजना राष्ट्रीय बोवाईन उत्पादकता मिशन को 825 करोड़ रुपए के आबंटन के साथ अनुमोदित किया है। देश में पहली बार राष्‍ट्रीय गौकुल मिशन के अंतर्गत ई पशु  हाट पोर्टल स्थापित किया गया है।

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