धान की फसल में हानिकारक कीड़ों के बारे में बताएगा यह उपकरण

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प्रतीकात्मक चित्र

धान की फसल में हानिकारक कीड़ों के बारे में बताएगा यह उपकरण

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान फसल में हानिकारक कीड़ों की निगरानी करने प्रकाश प्रपंच उपकरण का उपयोग करने की सलाह दी है। जारी सम-सामयिक कृषि बुलेटिन में कहा है कि प्रकाश प्रपंच उपकरण फसल से थोड़ी दूर पर लगाकर शाम 6.30 बजे से रात 10 बजे तक बल्ब जलाना चाहिए। इसके बाद एकत्रित कीड़ों को सुबह नष्ट कर देना चाहिए।

धान खेतों की मेड़ों को बांधकर पानी रोकने का सही समय है। रोपा लगाने के बाद खेतों में पांच सेंटीमीटर से ऊपर पानी रोक कर रखा जाना चाहिए। अधिक पानी होने से धान कंसों की संख्या प्रभावित होती है। जहां धान की बोनी फसल 25 दिनों की हो गई हो, वहां 5 से 10 सेंटीमीटर पानी होने की स्थिति में बियासी कर लेना चाहिए। बियासी के तुरंत बाद सघन चलाई करना फायदेमंद होता है, इससे कम से कम पौधे नष्ट होते हैं। चलाई के समय  प्रति वर्ग मीटर में 150 की संख्या में पौधे होने चाहिए।

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रासायनिक निंदा नियंत्रण फसल की प्रारंभिक अवस्था में ही कारगर होता है। धान रोपा लगाते समय पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखनी  चाहिए। प्रत्येक तीन मीटर के पश्चात 30 सेंटीमीटर की पट्टी निरीक्षण पथ के रूप में छोड़ना जरूरी है। नत्रजन उर्वरक का उपयोग रोपा लगाने के सात दिन बाद करना चाहिए। स्वचलित यंत्र द्वारा धान रोपाई करने के पूर्व खेतों की उथली मचाई ट्रैक्टर चलित रोटरी पडलर द्वारा की जानी चाहिए। स्वचलित यंत्र द्वारा रोपाई के लिए तैयार की गई मेट टाइप नर्सरी में यह ध्यान रखना चाहिए कि पौधों की जड़ों की लम्बाई अधिक न हो।

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