जानिए इस वर्ष किसानों को विभिन्न उर्वरकों पर कितनी सब्सिडी दी जाएगी

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subsidy on fertilizers

वर्ष 2021–22 में उर्वरकों पर दी जाने वाली सब्सिडी

अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में पी-एंड-के उर्वरक के भाव लगातार बढ़ रहे हैं, जिसके कारण भारत में भी पी-एंड-के आधारित उर्वरकों के भाव में वृद्धि कर दी गई थी | केंद्र सरकार ने किसानों को बढ़ते उर्वरकों के दामों को नियंत्रित करने और किसानों को कम दरों पर उपलब्ध करवाने के लिए विभिन्न पी-एंड-के उर्वरकों पर पोषक तत्त्व आधारित सब्सिडी तय कर दी है | यह सब्सिडी अभी सिर्फ खरीफ सीजन के लिए ही है | जिससे फिलहाल तो किसानों को बढे हुए उर्वरकों के दामों में राहत मिल गई है |

भारत सरकार उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करती है, खासतौर से यूरिया और 22 ग्रेड वाले पी-एंड-के उर्वरकों की, जिसमें डीएपी भी शामिल है। ये उर्वरक किसानों को सब्सिडी के आधार पर उर्वरक निर्माताओं/आयातकों को दिए जाते हैं | पी-एंड-के उर्वरकों पर सब्सिडी एनबीएस योजना के आधार पर दी जाती है | यह सब्सिडी एनबीएस दरों पर उर्वरक कंपनियों को जारी की जायेगी जिससे किसानों को सस्ती कीमत पर उर्वरक मिल सके।

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सरकार इस वर्ष कितनी सब्सिडी देगी ?

केंद्र सरकार ने पहले ही डीएपी उर्वरक पर 1200 रूपये प्रति 50 किलोग्राम के पैकेट पर सब्सिडी दे रही है, जो प्रति किलोग्राम 24 रुपये है | अब सरकार ने वर्ष 2021–22 के लिए अन्य रासायनिक उर्वरकों पर सब्सिडी तय कर दी है |अतिरिक्त सब्सिडी की इस व्यवस्था से लगभग 14,775 करोड़ रुपये के बोझ का अनुमान है। यह सब्सिडी इस प्रकार है :-

  • नाईट्रोजन N – 18.789 रुपये प्रति किलोग्राम
  • फास्फोरस P– 45.323 रुपये प्रति किलोग्राम
  • पोटाश K– 10.116 रूपये प्रति किलोग्राम
  • सल्फर S – 2.374 रूपये प्रति किलोग्राम

देश में उर्वरकों की आवश्यकता एवं उत्पादन

फसलों के उत्पादन बढ़ाने तथा मिट्टी में पोषक तत्वों कि मात्रा बढ़ाने के लिए नाईट्रोजन, पोटाश तथा फास्फोरस की जरूरत होती है | इसके लिए किसानों को सरकार जरूरत के हिसाब से उर्वरक उपलब्ध कराती है | केन्द्रीय रसायन तथा उर्वरक मंत्री के द्वारा संसद में 16 मार्च 2021 को एक सवाल के जवाब देते हुए बतायें कि देश में वर्ष 2019–20 में कितनी उर्वरक की खपत तथा उत्पादन होता है इसकी जानकारी दी थी जिसके अनुसार-

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वर्ष 2019 में यूरिया कि मांग 33.526 मिलियन मैट्रिक टन है | इसी प्रकार डीएपी 10.330 मिलियन मैट्रिक टन, एनपीके 10.482 मिलियन मैट्रिक टन तथा एमओपी 3.812 मिलियन मैट्रिक टन की आवश्यकता है | मांग के अनुसार उत्पादन कम होने के चलते केंद्र सरकार विभिन्न प्रकार के उर्वरक का आयात करता है |

उर्वरकों का उत्पादन और आयात

वर्ष 2019–20 में यूरिया का कुल उत्पादन 24.455 मिलियन मैट्रिक टन था, जबकि डीएपी का उत्पादन 4.550 मिलियन मैट्रिक टन रहा | इसी प्रकार एनपीके का उत्पादन 9.334 मिलियन मैट्रिक टन रहा है | इसकी पूर्ती करने के लिए सरकार ने यूरिया का आयात 9.123 मिलियन मैट्रिक टन तथा डीएपी का आयात 4.87 मिलियन मैट्रिक टन किया था | इसी प्रकार एनपीके का आयात 0.746 मिलियन मैट्रिक टन तथा एमओपी का आयात 3.67 मिलियन मैट्रिक टन किया गया था |

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