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कोरोना लॉकडाउन में भी 25 लाख किसानों को दिया जायेगा 16 हजार करोड़ रूपये का ब्याज मुक्त फसली ऋण

किसान ले सकते हैं फसली ऋण

वित्त वर्ष 2019-20 का खरीफ तथा रबी सीजन पूरा हो गया है अब नया वर्ष शुरू होने हो गया है, किसान अब 2020-21 खरीफ फसल के लिए नया फसली ऋण ले सकते हैं | इसके लिए राज्य सरकार द्वारा किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए ब्याज मुक्त फसली ऋण करवाया जा रहा है | फसली ऋण किसानों को खेती किसानों के कार्यों में लगने वाली लागत के लिए दिया जाता है जिससे किसान समय पर खाद,बीज एवं कीटनाशक आदि समय पर ले सकें | उन्हें खेती करते समय किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़ता है |

राजस्थान राज्य अपने राज्य के किसानों के लिए इस माह से सहकारी बैंक से फसली ऋण देना शुरू कर रही है | यह फसली ऋण ब्याज मुक्त होने के साथ – साथ 25 प्रतिशत अधिक ऋण दिया जाएगा | जिससे किसान कृषि में उपयोग होने वाली बीज, उर्वरक, जुताई डीजल इत्यादी खरीद सकते है | कोरोना वायरस को देखते हुए राज्य सरकार ने फसली ऋण देने के समय में देरी कर दी है | अब सहाकरी बैंक से ऋण देने का समय निर्धारित कर दिया गया है | किसान समाधान राज्यस्थान में 16 अप्रैल से दिये जाने वाले फसली ऋण की जानकारी लेकर आया है |

किसानों को मिलेगा 25 प्रतिशत अधिक फसली ऋण

वर्ष 2020–21 के लिए फसली ऋण 16,000 करोड़ रूपये दिए जाएंगे | इसमें से 10 हजार करोड़ रूपये खरीफ मौसम के लिए तथा 6 हजार करोड़ रूपये रबी मौसम के लिए दिए जाएंगे | पिछले वर्ष खराब मौसम के कारण तथा टिड्डी के हमले खराब हुए फसलों को मद्दे नजर रखते हुए राज्य सरकार ने पहले ही यह घोषणा कर चुकी थी कि फसली ऋण वर्ष 2020-21 के लिए 25 प्रतिशत बढ़ाकर दिया जायेगा | अर्थ किसानों की साख लिमिट को बढाया जा रहा है | 

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वर्ष 2020–21 के लिए राजस्थान में ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड बनाने का कार्य शुरू किया गया था | राजस्थान ऑनलाइन KCC बनाने वाला पहला राज्य है | इसके अंतर्गत काफी नये किसानों को जोड़ा गया है तथा राज्य सरकार ने सहाकरी बैंक से 3 लाख नए किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है | सभी किसानों को जोड़कर इस वर्ष खरीफ तथा रबी मौसम के लिए 25 लाख किसानों को फसली ऋण दिया जाएगा |  

फसली ऋण किसान कब से ले सकते हैं ?

सहकारी बैंक से दिये जाने वाले फसली ऋण वर्ष भर में दो बार दिया जाता है | यह ऋण समय पर चुकाने पर ब्याज मुक्त रहता है | राजस्थान के सहकारिता मंत्री ने बताया कि केन्द्रीय सहकारिता बैंकों द्वारा वितरित होने वाला अल्पकालीन फसली ऋण खरीफ सीजन में 1 अप्रैल से 31 अगस्त तक दिया जाता है तथा रबी सीजन में 1 सितम्बर से 31 मार्च तक किसानों को वितरित किया जाता है लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते देश भर में 14 अप्रैल तक लाकडाउन होने के कारन ऋण वितरण 16 अप्रैल से प्रारंभ किया जाएगा |

खरीफ मौसम के लिए इन जिलों को 10 हजार करोड़ रूपये का लोन दिया जाएगा

खरीफ मौसम में किसानों को कृषि कार्य के लिए ऋण देने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया गया है | इसकी जानकारी देते हुए राजस्थान के प्रबंध नदेशक एपेक्स बैंक श्री इंदरसिंह ने बताया कि खरीफ सीजन में केन्द्रीय सहकारी बैंक सबसे ज्यादा खरीफ मौसम में फसली ऋण देगी | ऋण देने का लक्ष्य इस प्रकार है :-

  • श्रीगंगा नगर – 700 करोड़ रूपये
  • हनुमानगढ़ – 630 करोड़ रूपये
  • बाड़मेर – 600 करोड़ रूपये
  • जयपुर – 570 करोड़ रुपयें
  • पाली – 500 करोड़ रूपये
  • सीकर – 470 करोड़ रूपये
  • जोधपुर – 460 करोड़ रूपये
  • चित्तौडगढ़ – 460 करोड़ रूपये
  • जालोर – 450 करोड़ रूपये
  • भीलवाडा – 430 करोड़ रूपये
  • झालावाडा – 410 करोड़ रूपये
  • झुंझुनूं 350 करोड़ रूपये
  • नागौर – 340 करोड़ रूपये
  • कोटा – 340 करोड़ रूपये
  • अलवर – 330 करोड़ रूपये
  • अजमेर – 310 करोड़ रूपये
  • भागलपुर – 300 करोड़ रूपये
  • सवाईमाधोपुर – 290 करोड़ रूपये
  • बीकानेर – 240 करोड़ रूपये
  • चुरू – 240 करोड़ रूपये
  • दौसा – 220 करोड़ रूपये
  • उदयपुर – 220 करोड़ रूपये
  • बूंदी – 220 करोड़ रूपये
  • बारां – 200 करोड़ रूपये
  • जैसलमेर – 180 करोड़ रूपये
  • सिरोही – 170 करोड़ रूपये
  • बांसवाडा – 150 करोड़ रूपये
  • डूंगरपुर – 120 करोड़ रूपये
  • टोंक – 100 करोड़ रूपये
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यह सभी ऋण जिले के सहकारी बैंकों में किसानों के द्वारा पंजीकृत संख्या के आधार पर दिया जा रह है | इसके साथ ऋण प्राप्त करने वाले किसानों से किसी भी प्रकार का ब्याज नहीं लिया जाएगा |

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13 टिप्पणी

  1. योजनाओं का लाभ सुनकर किसान के चेहरे में जो रौनक आती है उसकी क्या बात है मन ही मन न जाने कितने सपनों को पंख लगा सपनों की उड़ान भर लेता है पर जब जगह जगह बैंक और सरकारी दफ़्तरों के चक्कर लगाकर अपनी बेइज़्जती करवाकर किसान आता है उसके मन पर क्या बीतती है इसका मर्म सिर्फ और सिर्फ वही जनता है, जय जवान जय किसान यह सिर्फ नारों तक सीमित है कोई इज़्ज़त नहीं करता किसानों की मेरा तो यही अनुभव है जितनी मेहनत करता है…उसकी फसल में नुक्स निकालकर उसका उचित मूल्य तक नहीं मिलता बेचारे को धूप में सुबह से शाम जलकर खुद को तपा देता है बिना हराम की खाये सबको खिलाता है और ख़ुद न जाने कितनी बार थककर भूखा ही सो जाता है। किसानों की इज़्ज़त करें याद रखें कि सीमा पर जवान हैं क्योंकि देश के भीतर ये अन्नदाता(गुदड़ी के लाल) हैं। कृषि प्रधान देश में किसानों को सम्मान मिले ऐसी आशा करता हूँ। जब देखता हूँ कि शादी के लिए युवतियां डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस ,आईपीएस, govt. employee, mns companies के लड़कों को वरीयता क्रम में रखतीं हैं और लड़के के किसान होने पर सीधे रिजेक्ट कर देती हैं इसीसे देश का भविष्य नज़र आने लगता है । जिस काम में पैसे कम नुकसान की संभावना ज़्यादा हो ,फसल अच्छी होने पर दाम कम मिलें और बिचोलिये और दलाल फसल का मूल्य निर्धारित करें व किसान को सिर्फ़ और सिर्फ ठगा जाए । उसके उपरांत सम्मान भी न मिले तो देश याद रखे कि हम आर्थिक ग़ुलामी की बेड़ियों में जल्द ही नज़र आने वाले हैं। धन्यवाद….किसान समाधान की ओर से एक बार फिर से मेरी अपील है कि आप सब किसानों को सम्मान की दृष्टि से देखें वो हैं तो हम हैं । कुछ मक़्क़ो के दानों से बनने वाला कुरकुरे या चिप्स का पैकेट जितना महंगा है उससे कई ज्यादा मेहनत करके उगाए जाने वाले मक्के की किलो भर की कीमत सरकार 16 से 17 रुपये ही देती है। अब आप ख़ुद ही अनुमान लगा लें कि किसानों की डगर कितनी मुश्किल है।

  2. सरकार से गरीब लोगों को कबी बी कोई लाब नहीं मिलता है सोसायटी का लोन दोनो सरकार माफ किया था लेकिन गरीब लोगों के सोसाइटी का लोन ता ही नहीं ओर जीन लोगों के मकान गाडी हैं उनको लाब मिला ओर सरकार अबकी बार बी उनका लोन माफ करगे

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