अधिक पैदावार वाली मिर्च की किस्में और उनकी विशेषताएं

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mirchi varieties

मिर्च की किस्में एवं उनकी विशेषताएं

देश में मिर्च उत्पादन एवं उपभोक्ता के हिसाब से महत्वपूर्ण मसाला एवं नगदी फसल है | मसाले के लिए मिर्च में तीखापन होना जरुरी है | देश में हरी एवं लाल दोनों ही प्रकार की मिर्च का उपयोग वर्ष भर किया जाता है, साथ ही भारत मिर्च का एक बहुत बड़ा निर्यातक देश भी है | जिससे मिर्च की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है और यह किसानों के लिए अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है |

किसान अधिक पैदावार एवं लाभ के लिए अपने क्षेत्र की जलवायु एवं भूमि के अनुसार मिर्च की संकर एवं मुक्त परागित किस्मों का चयन कर अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं | किसान समाधान कुछ ऐसे ही किस्मों की जानकारी एवं उनकी विशेषताएं लेकर आया है |

मिर्च की उन्नत एवं विकसित किस्में

अर्का श्वेता

मिर्च की इस किस्म की लम्बाई लगभग 13 से.मी. एवं मोटाई 1.2 से 1.5 से.मी तक होती है | मिर्च की इस किस्म से 30-40 टन हरी मिर्च एवं 4-5 टन लाल मिर्च प्रति हैक्टेयर के अनुसार पैदावार प्राप्त की जा सकती है | यह किस्म विषाणु रोग के प्रति सहनशील होती है |

अर्का मेघना –

इस प्रजाति के मिर्च के पौधे लंबे, ओजस्वी एवं गहरे रंग के होते हैं | इसके फल की लम्बाई 10 से.मी. एवं रंग गहरा हरा होता है | इसकी परिपक्वता अवधि 150 से 160 दिनों की होती है | यह हरे एवं लाल दोनों तरह के फलों के लिए उपयुक्त किस्म है | हरी मिर्च से 30–35 टन व सूखी लाल मिर्च 5–6 टन प्रति हैक्टेयर का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है | यह प्रजाति चूर्णिल आसिता व वायरस के प्रति सहनशील होती है |

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काशी सुर्ख –

मिर्च की इस प्रजाति के पौधे लगभग 70 से 100 से.मी. मोटे ऊँचे एवं सीधे होते हैं | फल 10 से 12 से.मी. लंबे, हल्के हरे, सीधे तथा 1.5 से 1.8 से.मी. मोटे होते हैं | प्रथम तुडाई पौध रोपण के 50 से 55 दिनों बाद मिल जाती है | यह फल सूखे एवं लाल दोनों प्रकार के लिए उत्तम किस्म है | हरी मिर्च का उत्पादन 20 से 25 टन एवं सूखी लाल मिर्च 3 से 4 टन प्रति हैक्टेयर तक मिल जाती है |

काशी अर्ली –

इस प्रजाति की मिर्च के पौधे 60 से 75 से.मी. लंबे तथा छोटी गांठों वाले होते हैं | फल 7 से 8 से.मी. लंबे, सीधे 1 से.मी. मोटे तथा गहरे होते हैं | पौध रोपण के मात्र 45 दिनों में प्रथम तुड़ाई प्राप्त हो जाती है, जो सामान्य संकर किस्मों से लगभग 10 दिनों पहले होती है | हरे फल का उत्पादन 300 से 350 क्विंटल प्रति हैक्टेयर प्राप्त होता है |

पूसा सदाबहार

मिर्च कि यह किस्म पत्ती मोड़कर विषाणु, फल–सडन, थ्रिप्स एवं माइटस अवरोधी हैं | इसके पौधे लंबे व फल गुच्छों में लगते हैं हरी मिर्च का उत्पादन 8 से 10 टन प्रति हैक्टेयर मिल जाता है |

पूसा ज्वाला –

इसके फल लंबे, पतले, मुड़े हुए, कच्ची अवस्था में हरे एवं पकने पर गहरे लाल होते हैं | यह किस्म थ्रिप्स, माइट एवं माहू के प्रति सहनशील होती है | चरकाहट अधिक होने एवं छिलका पतला होने के कारण निर्यात के लिए उत्तम किस्म है | हरे फलों की औसत उपज 90 से 100 क्विंटल प्रति हैक्टेयर होती है |

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काशी अनमोल –

इस किस्म के पौधे सिमित बढवार वाले 40 से 50 से.मी. और छातानुमा होते हैं | फल ठोस सीधे एवं 6 से 7 से.मी. लंबे होते हैं | हरे फल के उत्पादन के लिए अच्छी किस्म है | फलों की औसत उपज 200 क्विंटल प्रति हैक्टेयर होती है |

आए.सी.एच.-1 –

यह किस्म कृषि अनुसंधान केंद्र, मंडोर, जोधपुर द्वारा विकसित की गई हैं | राजस्थान के शुष्क और अर्द्धशुष्क क्षेत्रों के लिए अच्छी प्रजाति है तथा खरीफ की फसल के लिए उपयुक्त है | यह किस्म सूखी मिर्च के रूप में अधिक उपज देती है और मसाले के लिए अधिक उपयोगी है |

फलों की तुडाई व उपज

किस्म के आधार पर फलों की तुडाई का सही समय उगाई जाने वाली किस्म पर निर्भर करता है | सामान्य: रोपाई के लगभग 80 से 90 दिनों बाद हरी मिर्च तोड़ने योग्य हो जाती है | एक सप्ताह के अंतराल पर मिर्च तोड़ते रहना चाहिए | सूखी मिर्च के लिए फलों को 140 से 145 दिनों बाद, जब मिर्च का रंग लाल हो जाता है, तब तोड़ा जाता है | बार–बार मिर्च तोड़ने से फलन अधिक होता है | हरी मिर्च की पैदावार 150 से 200 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तथा सूखी लाल मिर्च की उपज 15 से 25 क्विंटल प्रति हैक्टेयर होती है |

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