यहाँ किसानों को देना होता है सबसे कम मंडी शुल्क

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किसानों से लिया जाने वाला मंडी शुल्क

किसानों के द्वारा उत्पादित फसल, सब्जी, फल–फूल तथा अन्य प्रकार के उत्पाद को बेचने के लिए सभी राज्यों में मण्डी की व्यवस्था की गई है | कुछ राज्यों में मंडी की व्यवस्था ज्यादा है तो कुछ जगहों पर मण्डी कम है | मंडी में किसानों के लिए एक अच्छा बाजार के साथ ही अन्य प्रकार की सुविधा भी दी जाती है | जैसे पानी शौचालय, रुकने की व्यवस्था, गाड़ी पार्किंग की व्यवस्था शासन की तरफ से ही की जाती है | साथ ही हर राज्य सरकार यह दावा करती है की उसके राज्य की मंडी सर्वसुविधा युक्त है | मंडियों में किसानों को सुविधा देने के लिए सरकार द्वारा किसानों से मंडी शुल्क भी लिया जाता है |

जब किसान किसी मंडी में अपने उत्पाद को बेचते हैं तब उनसे मंडी शुल्क लिया जाता है जो राज्य के अनुसार अलग अलग होता है | मंडी शुल्क को लेकर राजथान विधान सभा में सवाल पूछा गया था कि राज्य में मंडी शुल्क कितना है | इसका जवाब देते हुए संसदीय मंत्री श्री शांति धारीवाल ने कहा कि राजस्थान में मंडी शुल्क अन्य राज्यों की तुलना में बहुत कम लिया जाता है तथा कुछ उत्पादों पर मण्डी शुल्क बिलकुल नहीं लिया जाता है |

किसान को किस राज्य में कितना मंडी शुल्क Tax देना होता है ?

संसदीय मंत्री धारीवाल ने विधान सभा में बताया है कि राजस्थान में मंडी टैक्स हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा गुजरात राज्यों से कम लिया जाता है जबकि पंजाब तथा मध्य प्रदेश के लगभग बराबर लिया जाता है |

  • राजस्थान में विकास शुल्क 1.60 रूपये पर 100 रुपये
  • उत्तर प्रदेश में 2.50 रूपये पर 100 रुपये
  • मध्यप्रदेश में 2.0 रूपये पर 100 रुपये परिवर्तित मंडी शुल्क दर 1.5 (2018 वर्ष) 
  • हरियाणा में 4.0 रुपये पर 100 रुपये
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तथा पंजाब में 4.0 लिया जाता है | जबकि गुजरात में अलग–अलग मण्डी में अलग–अलग टैक्स लिया जाता है | संसदीय मंत्री ने बताया है कि सुखा, चारा, काजू, फल – सब्जियां, कपास में टैक्स लिया जाता है, जबकि राज्य में इन सब पर कोई टैक्स नहीं लगता है |

मंडी शुल्क कब से लिया जा रहा है ?

विधायक श्री जगसी राम के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि राज्य में चीनी (शक्कर), बुरा, गुड एवं घी अधिसूचित कृषि जिंसों की अनुसूची में शामिल होने से इन जिंसों पर मंडी शुल्क लिया जाना प्रव्धित है | तेल अधिसूचित कृषि जिंसों की अनुसूचित में शामिल नहीं होने से तेल पर मंडी शुल्क लिया जाना प्रावधित नहीं है |

चीनी, गुड एवं घी पर मण्डी शुल्क राजस्थान कृषि उपज विपणन अधिनियम, 1961 के लागु होने की दिनांक 24 नवम्बर 1961 से लिया जाना प्रवाधित है | उन्होंने बताया कि बुरा पर मण्डी शुल्क दिनांक 24 सितम्बर 1976 से लिया जाना प्रावधित किया गया है | चीनी, बुरा, गुड एवं घी पर मण्डी शुल्क की दर 1.60 रु. प्रति सैकड़ा है |

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मंडी में लिए जाने वाले टैक्स का क्या होता है

किसानों के मन में एक बात जरुर आती है कि सरकार के द्वारा लिया जानेवाल मंडी शुल्क कहाँ खर्च किया जाता है | इसके बारे में संसदीय कार्य मंत्री श्री शांति धारीवाल ने बताया है कि गुड,घी, एवं चीनी से प्रतिवर्ष होने वाली आय राज्य में मण्डी शुल्क से प्राप्त होने वाली कुल आय का लगभग 13 प्रतिशत होती है | मंडी शुल्क से प्राप्त आय का उपयोग राजस्थान राज्य कृषि विपन्न बोर्ड, कृषि उपज मण्डी समितियों के संचालन, मण्डी प्रांगणों के विकास व संचालन, कृषि विपन्न की आधारभूत संरचना विकसित करने एवं कृषकों, मजदूरों व हम्मालों आदि के लिए विभिन्न योजनाओं के संचालन करने में किया जाता है | उन्होंने बताया कि उक्त कार्यों के लिए राज्य सरकार के बजट से मंडी समितियों को कोई राशी प्राप्त नहीं होती है |

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