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मंगलवार, जुलाई 23, 2024
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मखाना उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार दे रही है 75 प्रतिशत अनुदान

मखाने का उत्पादन और खेती का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं। इस कड़ी में बामेती के पटना सभागार में मखाना पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में मखाना उत्पादक किसानों को मखाना उत्पादन में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए सीधा संवाद किया गया और समस्याओं को दूर करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिये गये।

बिहार कृषि विभाग ने राज्य में मखाना उत्पादन का क्षेत्र दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कृषि विभाग मखाना उत्पादन क्षेत्रफल और किसानों के पास उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं का बेसलाइन सर्वे करा रहा है। 10 जिलों में किए जा रहे इस सर्वे का काम मई महीने के अंत तक हो जायेगा। बामेती में शुक्रवार को मखाना उत्पादन पर आयोजित किए गए कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कृषि सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने यह बात कही।

कृषि सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया और खगड़िया प्रमुख मखाना उत्पादक जिले हैं। यहाँ तालाब और खेत दोनों पद्धतियों से मखाना की खेती होती है। इन जिलों में मखाना उत्पादन क्षेत्र दोगुना करने और उत्पादन बढ़ाने की भरपूर संभावना है।

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मखाना उत्पादन के लिए सरकार दे रही है अनुदान

कृषि सचिव ने कहा कि किसानों को मखाना बीज हर दो साल पर बदल लेना चाहिए। सरकार मखाना बीज मूल्य पर 75 प्रतिशत या 5400 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान दे रही है। अभी तक 10 जिलों के 3,393 गाँव, 781 ग्राम पंचायत और 67 प्रखण्डों में मखाना की खेती की जा रही है। जिसमें मखाना उत्पादक किसानों की संख्या 9,777 है। इसमें 829 किसान तालाब प्रणाली, 8871 किसान खेत प्रणाली और 77 किसान दोनों प्रणाली से मखाना की खेती कर रहे हैं।

कृषि सचिव ने कहा कि मखाना की खेती के लिए प्रति इकाई लागत 10 लाख रुपये पर 75 प्रतिशत यानि 7.5 लाख रुपये का अनुदान दो किस्तों में लाभार्थी को दिया जाएगा। मखाना के लिए सेंटर ऑफ एक्सिलेंस की स्थापना भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय पूर्णिया में की जा रही है। मिथिला मखाना को 16 अगस्त 2022 में जीआई टैग मिला है।

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