अजोला चारे का उपयोग कर पशुओं से 20% अधिक दूध प्राप्त करें

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अजोला चारे का उपयोग कर पशुओं से 20% अधिक दूध प्राप्त करें

पशुओं का दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए अजोला चारा लगाकर पशुओं को खिलाएं इससे न सिर्फ दूध उत्पादन बढेगा बल्कि लागत भी कम होगी | वर्तमान में पशुओं हेतु उपयोगी पोषक तत्वों की उपलब्धता को देखते हुए अजोला को दुधारू जानवरों, मुर्गियों व बकरियों के लिए अच्छा पोषण विकल्प कहा जा सकता है | कम समय में अधिक उत्पादन देने के अपने विशिष्ट गुण की वजह से यह हरे चारे का भी अच्छा स्रोत बन गया है | वातावरण एवं जलवायु का अजोला उत्पादन पर विशेष प्रभाव न पड़ने के कारण इसका उत्पादन देश के सभी हिस्सों में किया जा सकता है | किसान सामान्य मार्गदर्शन से ही स्वंय अजोला का उत्पादन कर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं | यहाँ बताना भी प्रासंगिक होगा कि अजोला पशुओं के बांझपन में भी कमी आती है |

अजोला उगाने की विधि

उगाने के लिए उपलब्ध कई तकनीकों में से नेशनल रिसोर्स डेवलपमेंट विधि हमारे यहाँ प्रयोग की जा रही है | इस विधि में प्लास्टिक शीट की मदद से 2 X 2 X 0.2 मीटर पानी रखने हेतु क्षेत्र बनाते हैं | इसमें 10 से 15 कि.ग्राम उपजाऊ मिटटी बिछाते हैं | इस टैंक को 2 कि.ग्रा. गाय के गोबर खाद व 30 ग्राम सुपर फास्फेट के मिश्रण से भर देते हैं | पुन: पानी डालकर जल स्तर 10 से.मी. तक पहुंचा देते हैं | लगभग एक कि.ग्रा. अजोला कल्चर इसमें डालने हैं |

तेज वृद्धि के कारण 10 से 15 दिनों में 500 से 600 ग्राम अजोला प्रतिदिन मिलना शुरू हो जाता है | पुन: इसमें 20 ग्राम सुपर फास्फेट, एक कि.ग्रा. गोबर प्रत्येक 5 दिन पर डालने हैं | इसके अलावा आयरन, कापर, सल्फर आदि मिलाना चाहिए | इस विधि द्वारा प्रति कि.ग्रा. अजोला चारा उत्पादन के लिए 65 पैसे से कम खर्च आता है |

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दूध उत्पादन हेतु अजोला चारा

इसका उपयोग जानवरों में दूध की मात्र व वसा प्रतिशत बढ़ाने में किया जा रहा है, क्योंकि इसके उत्पादन में खर्च कम आता है | अत: दिन – प्रतिदिन इसकी उपयोगिता बढती जा रही है | अजोला पोषण से दूध उत्पादन 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ता है | इसका प्रयोग 60 ग्राम तक करने पर 10 प्रतिशत तक सांद्र आहार घटाया जा सकता है | संकर नस्ल की गाय में 2 कि.ग्रा. सांद्र आहार की जगह 2 कि.ग्रा. अजोला खिलाते हैं, तो दूध उत्पादन तथा श्रम दोनों मिलाकर लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक खर्च कम किया जा सकता है | अजोला को राशन के साथ 1:1 के अनुपात में सीधे पशुओं को दिया जा सकता है | इस तरह अगर हम देखें तो अजोला सही मात्र में दुधारू पशुओं के दूध को बढाता है व कम खर्च से आमदनी बढती है |

यदि किसान की संकर प्रजाति की गाय 10 लीटर दूध देने वाली है तो वह उसे सांद्र आहार 5.5 कि.ग्रा. देगी | यदि आहार की कीमत 20 रुपये प्रति कि.ग्रा. रखी जाये तो 110 रूपये प्रतिदिन का कि.ग्रा. रखी जाये तो इसमें लगभग 3 से 3.50 कि.ग्रा. सांद्र की जगह अजोला का प्रयोग किया जा सकता है, जिसकी कीमत 65 पैसे प्रति कि.ग्रा. है तो अजोला का प्रयोग करने से उस पशु के लिए 3 रूपये खर्च आयेगा | इस तरह 70 रूपये की जगह केवल लगभग 3 रूपये में दूध उत्पादन में लगभग 2 लीटर बढ़ोतरी होगी | इससे उसको कुल लाभ 2 लीटर दूध तथा 70 रूपये का राशन व मजदूरी तीनों से ही होगा | इस तरह किसान अपनी आय दोगुनी से भी ज्यादा कर सकते हैं |

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पोषक  तत्वों से भरपूर है अजोला

अजोला में भी आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं | इसमें लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है , जो कि लाइसिन, अर्जीनीन व मेथियोनीन का प्रमुख स्रोत है | अजोला में कम मात्र में लिग्निन होने के कारण पशुओं के शरीर में पाचन सरल ढंग से हो जाता है |पारंपरिक खाद यूरिया के स्थान पर अजोला के प्रयोग से उत्पादन में वृद्धि होती है | इसमें नाइट्रोजन 28 से 30 प्रतिशत, खनिज 10 से 15 प्रतिशत, बीटा कैरोटिन कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फास्फोरस, आयरन, कापर भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं | पोषक तत्वों की उपलब्धता के आधार पर अजोला को ग्रीन गोल्ड की संज्ञा भी दी जाती है |

अजोला उपयोगिता

अच्छे दूध उत्पादन के लिएजरुरी है कि कम खर्चे मैं दूध उत्पादन बढाया जाए | इस द्रष्टि से अजोला चारे के रूप में आसन, सस्ता व लाभकारी है | हमारे यहाँ चारा उत्पादन के लिए मात्र 5.25 प्रतिशत भूमि उपलब्ध है | अजोला का उत्पादन अत्यन्त ही सरल है, जिसे गाय,भैंस,बकरी, सूअर, मुर्गीपालन आदि के आहार के रूप मैं प्रयोग में लाया जाता है | यह तालाब, नदी, गड्डों, व टब आदि में आसानी से उगाया जा सकता है |

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