भेड़ एवं बकरी में रोगों की रोकथाम के लिए नि:शुल्क टीकाकरण अभियान

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Sheep and goat kaala chera teeka free

भेड़ एवं बकरी नि:शुल्क टीकाकरण कार्यक्रम

छोटे जानवरों जैसे भेड, बकरी इत्यादी में पेस्टेड पेटिट्स रुमिनेंट्स (पी.पी.आर) रोग लगता है | यह बहुत ही घातक रोग है इससे पशु की मौत तक हो जाती है | यह अनुवांशिक रोग जो पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ता रहता है | इसलिए इस रोग के इलाज के लिए तीन पीढ़ियों तक पशुओं का टीकाकरण किया जाता है | इस रोग की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2010 से पेस्टेड पेटिट्स रुमिनेंट्स (पी.पी.आर) नियंत्रण कार्यक्रम चला रही है | इस रोग के नियंत्रण के लिए राज्य तथा केंद्र सरकार मिलकर चला रहा है | इसमें 60 प्रतिशत केंद्र तथा 40 प्रतिशत राज्य खर्च करता है | इसके अलावा पूर्वोतर और 3 हिमालयी राज्यों (हिमाचल प्रदेश, जम्मू और काश्मीर तथा उत्तराखंड) में 90 प्रतिशत केंद्र तथा 10 प्रतिशत राज्य खर्च करता है | जबकि संघीय राज्य क्षेत्रों में 100 प्रतिशत केंद्र वहन करता है | इस योजना की पूर्ण जानकारी किसान समाधान लेकर आया है |

टीकाकरण योजना कितने राज्यों में लागु है 

वर्ष 2010 में इस योजना की शुरुआत किया गया था तब विभाग ने केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा और लक्ष्यद्वीप दमन और द्वीप, दादर और नागर हवेली, अंडमान निकोबार द्वीपसमूह और पंदुचेरी राज्य क्षेत्रों में लागु किया गया था | आगे चलकर वर्ष 2014 – 15 में योजना का विस्तार करते हुये पुरे देश में लागु कर दिया गया है |

पी.पी.आर. रोग (काला छेरा)

छोटे रोमान्थी पशुओं (भेड़ एवं बकरियों) में होने वाला वायरस जनित एवं अति संक्रमक रोग है | इस रोग में प्रभावित पशुओं में तीव्र ज्वर, दस्त तथा ग्रेस्टो – इन्टेस्टाईनल ट्रेकल की म्यूक्स मेम्ब्रेन्स में इन्फ्लेमेशन तथा नेक्रोसिस के लक्षण परिलक्षित होते हैं | इस रोग के कारण में मृत्यु दर अत्यधिक रहने के कारण पशुपालकों को भारी आर्थिक हानि का सामना करना पड़ता है |

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रोग का लक्षण क्या है ?

अगर आप के भेड़ , बकरी में अचानक ज्वर आना, निमोनिया और खांसी , प्रभावित पशु बेचैनी, सुस्त, शुष्क थूथन और खिन्न इच्छा के लक्षण दिखाई देते हैं  गर्भवती पशुओं का गर्भपात हो सकता है तो यह पेस्ट डेस पेटिट्स रूमीनेंटस (पीपीआर) हो सकता है |

संरचना एवं फैलाव

पीपीआर रोग फैलने के मुख्य कारण यह है :-

  1. संक्रमित पशुओं के साथ प्रत्यक्ष सम्पर्क | व्यस्क झुंड में रोग का फैलाव अधिक होता है |
  2. दुषित जल और चारा नोंद संपर्क के प्रभावित पशुओं के छिकतें समय अन्य पशुओं के साँस लेने से
  3. पशु हाट में अन्य पशुओं के संपर्क में आना , जहाँ विभिन्न स्रोत से पशुओं को साथ में लाया जाता है |

नियंत्रण

स्वस्थ पशुओं से बीमार पशुओं का अलग करना | उनके स्थान को नियमित रूप से साफ और स्वच्छ रखना | यदि पशुओं को अलग व्यवस्थित स्थान में रखा गया है और प्रकोप फैलने के पक्ष में दिखे, तो सावधानी बरतनी चाहिए |

पी.पी.आर. की रोकथाम के लिए टीकाकरण जरुर लगवायें |

राजस्थान में अक्तूबर से नवम्बर तक टीका करना चलाया जायेगा ?

जैसा की यह योजना देश भर में लागु है | इसकी के तहत राजस्था में इस वर्ष टीकाकरण चलाया जायेगा | इसकी पूरी जानकारी इस प्रकार है |

कार्य योजना :-

यह योजना भारत सरकार के द्वारा चलाया जा रहा है | इसलिए योजना के क्रियान्वयन हेतु प्राप्त निर्देशों एवं गाईडलाइन के अनुसार , प्रदेश की भेद एवं बकरियों (पशुगणना 2012 के अनुसार कुल संख्या – 307 लाख) की 80 प्रतिशत पशुओं में pulse mode पर पी.पी.आर. रोग प्रतिरोधक टीकाकरण पर किया जाना है |

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वर्ष 2018 – 19 में 245.95 लाख पशुओं का टीकाकरण के लक्ष्यों के विपरीत उपलब्ध वित्तीय प्रावधानों की सीमा के अनुसार 171.483 लाख छोटे रोमान्थी पशुओं में पी.पी.आर. रोग प्रतिरोधक टीकाकरण सम्पादित किया गया है | वर्ष 2019 – 20 में पिछले वर्ष के शेष रहे पशुओं तथा नये जन्मे भेद एवं बकरियों में टीकाकरण किये जाने की कार्ययोजना का निर्माण किया गया है | तदनुसार चालू वित्तीय वर्ष में 182.25 लाख भेद एवं बकरी वंशीय पशुओं में टीकाकरण कार्य सम्पादित किये जाने के लक्ष्य निर्धारित किये गए हैं |

इस योजना से राजस्था में पी.पी.आर रोग से मुक्त कर दिया जायेगा | इसके लिए 3 से 4 वर्षों तक लागातार टीकाकरण चलाया जायेगा | योजना के तहत पिछले तिन वर्षों से राजस्थान में टीकाकरण चलाया जा रहा है | जिससे वर्ष 2016 – 17 में 9.987 , 2017 – 18 में 26.02 तथा 2018 – 19 में 171.483 छोटे पशुओं को टीकाकरण किया गया है |

वर्तमान स्थिति :- क्रियाशील

भौतिक लक्ष्य :- वर्ष 2018 – 19 में प्रेदश में 182.25 लाख पशुओं को टीकाकरण किया जायेगा |

यह टीकाकरण कब चलाया जायेगा ?

वर्ष 2019 – 20 में माह अक्तूबर – नवम्बर 2019 में सम्पादित किया जाना प्रस्तावित है |

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