गर्मियों में दीनानाथ घास की बुवाई से पशुओं के लिए हरा चारा तैयार करें

पशुओं के लिए हरे चारे के लिए लगाएं दीनानाथ घास

भारत के किसान पशुओं को चारे के रूप में फसलों के अवशेष का उपयोग करते हैं जो पोषक तत्वों में काफी कम रहते हैं  | अपर्याप्त पोषक चारा की दशा में पशुधन की उत्पादकता का पुर्न दोहन नहीं किया जा सकता है | पशुओं के लिए हरा चारा अति आवश्यक है | पशुओं के रख – रखाव पर लगभग 60 प्रतिशत लागत चारा व दाने में आती है | चारा आधारित पशु प्रबंधन से पशु पुष्ट रहते है व अधिक मात्रा में दूध तथा मांस के लिए पशुओं में तेजी से विकास होती है |

इसलिए किसान समाधान पशुओं की हर चारा के लिए दीनानाथ घास  की जानकारी लेकर आया है | जिसे अपनाकर किसान 6 माह तक पशुओं को चारा उपलब्ध करा सकते हैं |

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दिनानाथ घास सभी जगहों पर आसानी से उगाई जा सकती है | यह कम वर्षा आधारित क्षेत्र में जल्दी उगने वाली , सुखा शन करने वाली बहुवर्षीय चारा फसल है |

दीनानाथ घास के लिए भूमि :-

दोमट व बलुई दोमट मिटटी अच्छी होती है , परन्तु उचित प्रबंधन के द्वारा इसे किसी भी प्रकार की भूमि में आसानी से उगाया जा सकता है |

दीनानाथ घास के लिए  खेत की तैयारी :-

 दो से तीन  जुताई करके मिटटी को भुर – भूरी कर लेनी चाहिए |

दीनानाथ घास के लिए बुवाई :-

बुवाई का उचित समय जून – जुलाई माह होता है | सिंचित क्षेत्र में इसे मार्च – अप्रैल में भी उगा सकते हैं | इसे बोने के लिए कतार से कतार की दुरी 40 से.मी. व बीज की गहराई – 1 – 1.5 से.मी. होनी चाहिए | इसकी नर्सरी में पौध तैयार करके भी द्वारा रोपाई कर सकते हैं |

दीनानाथ घास के लिए  बीज की मात्रा :-

छिड़काव विधि से 6 – 8 किलोग्राम प्रति हे. बीज की आवश्यकता पड़ती है जबकि नर्सरी द्वारा पौध तैयार करने के लिए 3 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है |

दीनानाथ घास के लिए खाद एवं उर्वरक ;-

8 – 10 टन सड़ी गोबर की खाद बुवाई से पूर्व खेत में डाले | 60 – 70 किलोग्राम नत्रजन को दो भागों में बांटकर आदि मात्रा बुवाई / रोपाई के समय शेष रोपाई के 6 – 7 सप्ताह फसल में छ्द्कें |

दीनानाथ घास के लिए उन्नत किस्में :-

बुँदे दीनानाथ – 1, एवं 2, जवाहर पेनिसेटम – 12 एवं सी.ओ.डी. – 1 प्रमुख है |

दीनानाथ घास के लिए सिंचाई :-

सामान्यत: वर्षा ऋतू की फसल को सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है | मार्च – अप्रैल में उगाई गई फसल में वर्षा होने तक प्रत्येक 10 – 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए |

दीनानाथ घास के लिए कटाई प्रबंधन :-

बीज द्वारा बोये गए फसल की काटाई बुवाई के 80 – 100 दिन पर करें जबकि रोपाई की फसल को 65 से 75 दिन पर काटाई करते हैं | काटाई भूमि से करीब 10 – 12 से.मी. ऊपर से करनी चाहिए | जिससे पुन: शीघ्र फुटान हो सके |

दीनानाथ घास के लिए उपज :-

औसत 550 – 650 कुंटल / हे. हरा चारा प्राप्त होता है |

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