किसान अब अपनी उपज स्वयं एक व्यापारी बनकर बेच सकेगें

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किसान स्वयं ब्रांड बनाकर बेचें अपनी उपज

केंद्र सरकार के द्वारा किसानों की आय बढ़ाने को लेकर फसल बिक्री को लेकर नियमों में संशोधन किये गए हैं | सरकार द्वारा एक देश, एक कृषि बाजार एवं बाधा मुक्त व्यापार एक राज्य से दुसरे राज्यों में उपज खरीदने बेचने आदि नियमों में परिवर्तन किया गया है | इन परिवर्तनों के चलते किसान अब अन्य राज्यों में भी किसान अपनी उपज बेच सकते हैं | इसके लिए राज्य सरकारों के द्वारा भी तैयारी की जा रही है | इसको लेकर राज्य सरकारों के द्वारा मंडी नियमों में परिवर्तन किया जा रहा है | हरियाणा एवं मध्यप्रदेश राज्यों में किसानों को बाजार उपलब्ध तैयार करने के लिए पहल की गई है |

सरकार द्वारा लाए गये दो अध्यादेश ‘कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश 2020’ तथा ‘मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और सुरक्षा) समझौता अध्यादेश-2020’ से किसान अपनी उपज की बिक्री मर्जी के अनुसार न केवल अपने राज्य में बल्कि दूसरे राज्यों की मंडियों में भी कर सकता है। इस प्रकार वह अनुबंध खेती के तहत अपनी उपज पर किसी भी व्यक्ति या बैंक के साथ ई-अनुबंध कर सकता है। अब उसे फसली ऋण के लिए बैंक के पास जमीन गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होगी।

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किसान स्वयं ब्रांड बनाकर बेच सकेगें उपज

हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री जय प्रकाश दलाल ने कहा है कि किसान अपना उत्पाद स्वयं एक व्यापारी बनकर बेचें, इसके लिए योजनाएं तैयार की जा रही हैं, चाहे वे एफपीओ के माध्यम से बेचें या स्वयं अपना ब्रांड बनाकर बेचें। अब सहकारिता विभाग के माध्यम से गांव व शहरों में 2000 ‘रिटेल आउटलेट’ खोलने की एक नई योजना तैयार की जा रही है। ये ‘रिटेल आउटलेट’ मिनी सुपर मार्केट के रूप में कार्य करेंगे।

समर्थन मूल्य पर भी किसान बेच सकेगें अपनी उपज

श्री जय प्रकाश दलाल ने कहा कि किसान की आय वर्ष 2022 तक दोगुणी करने के प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों से फसलों की बुआई आरम्भ होने से पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर दिए जाते हैं। इससे किसान अपनी इच्छा के अनुसार फसल बोने का मन बना सकता है। उन्होंने कहा कि ये दोनों अध्यादेश आने से अगर किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी अधिक दाम मंडियों से बाहर मिलते हैं तो वह फसल बेच सकता है, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तो सरकार खरीदेगी ही अन्यथा भावांतर भरपाई योजना में फसल के भाव के अन्तराल को पूरा किया जाएगा।

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