किसान अब एक दिन में 40 क्विंटल से भी ज्यादा बेच सकेगें सरसों,चना एवं मसूर की उपज

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सरसों, चना एवं मसूर की उपज बिक्री सीमा समाप्त

वर्ष 2019–20 के रबी सीजन की सरकारी खरीदी अंतिम दौर में चल रहा है | यह खरीदी देश के सभी राज्यों के द्वारा केंद्र सरकार के तरफ से घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रहा है | न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए किसान को पहले पंजीयन करना जरुरी रहता है | इस पंजीयन के आधार पर ही किसानों से उनकी फसल कि खरीदी की जाती है | इसके बाबजूद भी एक किसान एक दिन में मात्र 25 क्विंटल ही बेच सकते हैं | यह सीमा अलग–अलग राज्य में अलग–अलग है | मध्य प्रदेश में एक दिन में 25 क्विंटल ही मसूर, चना तथा सरसों कि खरीदी की जा सकती थी | कोविड–19 के कारण देश में लगे लॉक डाउन को देखते हुए यह सीमा 25 से बढ़ाकर 40 क्विंटल कर दी गई थी |

अब किसान 40 क्विंटल से अधिक उपज भी बेच सकेगें

इसके बाबजूद भी बड़े किसानों को 40 क्विंटल से ज्यादा बेचने के लिए खरीदी केंद्र पर दो बार आना पड़ता था | जिससे कोविड–19 का शिकार होने कि उम्मीद ज्यादा हो जाती है | इसको देखते हुए मध्य प्रदेश के किसान कल्याण तथा कृषि मंत्री श्री कमल पटेल के अनुरोध एवं उपार्जन कि अधिकतम सीमा हटाने के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर से गुहार लगाई थी |

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भारत सरकार ने कृषि मंत्री के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मध्यप्रदेश में चना, मसूर तथा सरसों के प्रतिदिन , प्रति व्यक्ति 40 किवंटल कि उपार्जन सीमा को समाप्त कर दिया है | अब किसान चना , मसूर तथा सरसों कि जितनी उपज है उसे लेकर मंडी में आ सकता है ओर विक्रय कर सकता है | भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के डायरेक्टर श्री सतीश भूषण ने उक्त संबंध में आज आदेश जारी कर दिया है | इसका मतलब यह हुआ कि आज से ही यह आदेश लागू कर दिया गया है |

अब तक मसूर, चना, तथा सरसों की कुल खरीद

मध्य प्रदेश में चना, सरसों तथा मसूर खरीदी चल रही है | प्रदेश में 24 मई तक 95 हजार किसानों से 1 लाख 40 हजार मीट्रिक टन (14 लाख किवंटल) चना, 34 हजार 300 किसानों से 73 हजार मीट्रिक टन (लाख 30 हजार किवंटल) सरसों एवं 1 हजार 47 कृषकों से 600 मीट्रिक टन (6000 किवंटल) मसूर का उपार्ज किया जा चूका है |

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प्रदेश के 691 केन्द्रों पर यह खरीदी कि गी है | गत वर्ष किसानों से चने कि खरीदी अधिकतम 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के आधार पर की गी थी , जिसे इस वर्ष वास्तविक उपज के मान बढ़ाकर 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर कर दिया गया था अब यह सीमा भी समाप्त कर दी गई है |

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