किसान समय पर फसलों की सिंचाई कर उत्पादन बढ़ाने के साथ ही वर्ष में एक से अधिक फसल लें सकें इसके लिए सरकार द्वारा किसानों को सिंचाई यंत्रों के साथ ही संरचनाओं के निर्माण पर अनुदान दिया जा रहा है। इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों के द्वारा कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इस कड़ी में बिहार सरकार द्वारा किसानों को ड्रिप, स्प्रिंकलर, कूप और तालाब के निर्माण पर अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
बिहार के उप मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य में जल संरक्षण, कृषि और किसानों की आय वृद्धि को प्राथमिकता देते हुए “प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना प्रति बूंद अधिक फसल” के अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों जैसे ड्रिप एवं स्प्रिंकलर प्रणाली को प्रोत्साहित कर रही है। ताकि जल संसाधनों का समुचित उपयोग हो सके और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ-साथ अधिक लाभ प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा 14066.66 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। जिससे अधिक से अधिक किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिल सके।
ड्रिप, स्प्रिंकलर, कूप और तालाब निर्माण के लिए मिलेगा अनुदान
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसानों को सिंचाई के आधुनिक साधनों से जोड़ना है, ताकि खेती में पानी की बचत, उत्पादकता में वृद्धि और लागत में कमी सुनिश्चित की जा सके। योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाने पर लघु एवं सीमांत किसानों को कुल लागत पर 80 प्रतिशत तथा अन्य किसानों को 70 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं पोर्टेबल स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के लिए लघु एवं सीमांत किसानों को 55 प्रतिशत तथा अन्य किसानों को 45 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त योजना में व्यक्तिगत नलकूप या सबमर्सिबल पम्प की स्थापना के लिए किसानों अधिकतम 40,000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा जो किसान ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाते हैं, उन्हें तालाब या कुआं निर्माण हेतु कुल लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम 75,000 रुपए तक अनुदान देने की व्यवस्था की गई है। इससे किसानों को जल स्रोतों के सृजन में भी मदद मिलेगी और सिंचाई की स्थाईत्वता सुनिश्चित होगी।
किसानों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
कृषि मंत्री ने बताया कि योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु विशेष प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित किए जाएँगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों की जानकारी दी जाएगी और उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। ताकि इस तकनीक का प्रयोग करके किसान 60 प्रतिशत तक जल की बचत और उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकें।
उन्होंने कहा कि यह योजना केवल सिंचाई सुविधा का विस्तार भर नहीं है, बल्कि यह जल प्रबंधन में दक्षता, खेती की लागत में कमी और किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में बिहार सरकार का एक ठोस और प्रभावशाली प्रयास है। सरकार का उद्देश्य है कि राज्य के अधिक से अधिक किसान इस योजना से लाभान्वित हो और आधुनिक लाभकारी एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाएं।



