गन्ने की खेती का आदर्श मॉडल अपनाने वाले किसान ‘उत्तम गन्ना कृषक’ की उपाधि से होंगे सम्मानित

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गन्ने की खेती का आदर्श मॉडल

किसानों की आमदनी दूगना करने के लिए यह जरुरी है कि कृषि लागत को कम किया जाए और फसल के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाया जाए इसके अतिरिक्त किसानों को उपज का सही मूल्य मिले | फसल उत्पाद का मूल्य बहुत कुछ बाजार पर निर्भर करता है | ऐसे में यह जरुरी बन जाता है की किसान कृषि लागत को कम करे | कृषि में उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए जरुरी है कि किसान फसल उत्पादन की नई तकनीकों को अपनाएं जैसे- सहफसली खेती, सिंचाई की नवीनतम तकनीक आदि |

उत्तरप्रदेश राज्य सरकार ने किसानों को कृषि की नई तकनीके अपनाने एवं कृषि लागत को कम करने वाले किसानों को सम्मानित करने का फैसला लिया है | जिसके तहत ऐसे किसान जो आदर्श तरीके से नई तकनीक को अपनाकर गन्ने की खेती करेंगे उन्हें सम्मानित किया जायेगा |

गन्ने की खेती के लिए पंचामृत नाम से नई तकनीक की शुरुआत

राज्य के गन्ना विकास विभाग ने अनेक कदम उठाने जा रही है | सरकार ने गन्ने की खेती के लिए नई तकनीकों को समन्वित कर खेती करने के लिए योजना शुरू की है इन तकनीकों “पंचामृत” का नाम दिया गया है | गन्ने की खेती के लिए समन्वित रूप से ट्रैंच प्लांटिंग, सहफसली खेती, रैटून मेनेजमेंट, ट्रैश मल्चिंग एवं ड्रिप सिंचाई जैसी नवीन तकनीकों को अपनाया जायेगा | इस प्रकार समन्वित प्रबन्धन करते हुए पंचामृत पद्धत्तियों के माध्यम से जिन प्लाटों पर खेती की जाएगी उन्हें “आदर्श माँडल” के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा |

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आधुनिक पद्धतियों से गन्ने की खेती करने से होने वाले लाभ

गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीकी पद्धतियों को समन्वित रूप से अपनाने से गन्ने की उत्पादन लागत में कमी आएगी तथा गन्ने की उपज में बढ़ोत्तरी के साथ–साथ पानी की बचत, भूमि की उर्वरता शक्ति में वृद्धि एवं बाजार तथा घरेलू मांग के अनुसार खाद्धान्न, दलहन, तिलहन, शाक–भाजी आदि फसलों का उत्पादन जैसे अनेक लाभ होंगे |

किसानों को “उत्तम गन्ना कृषक” उपाधि से किया जायेगा सम्मानित

ऐसे किसान जो अपने गन्ने के खेतों में ट्रेंच विधि से बुवाई, सफसली खेती एवं ड्रिप के प्रयोग एक ही खेत पर शुरू करेंगे उन सफल कृषकों को विभागीय योजनाओं तथा कार्यक्रमों के अंतर्गत उपज बढ़ोत्तरी में प्राथमिकता तथा “उत्तम गण कृषक” का प्रमाण–पत्र भी दिया जाएगा |

आदर्श मॉडल कार्यक्रम काम कैसे करेगा ?

इस कार्यक्रम की शुरुआत हेतु शरदकालीन बुवाई का समय महत्वपूर्ण है तथा इस बुआई के अंतर्गत प्रारम्भिक तौर पर प्रदेश में कुल 1,555 कृषकों का चयन कर गन्ना खेती के आदर्श मांडल प्लाट का न्यूनतम क्षेत्रफल 0.5 हेक्टेयर होगा तथा मध्य एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रत्येक गन्ना विकास परिषदों में न्यूनतम 10 एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश की गन्ना विकास परिषद में न्यूनतम 05 आदर्श मांडल का चयन किया जाना अनिवार्य होगा |

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शरदकालीन बुवाई 2021–22 के अंतर्गत ट्रेंच विधि से बुवाई का लक्ष्य 2,20,000 हेक्टेयर गन्ने के साथ सहफसली खेती का लक्ष्य 2,20,000 हेक्टेयर एवं ड्रिप सिंचाई के आच्छादन का लक्ष्य 777 हेक्टेयर भी निर्धारित किया गया है |

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