back to top
गुरूवार, अप्रैल 18, 2024
होमकिसान समाचारकिसान इस तरह करें धान की फसल में लगने वाले खरपतवारों का...

किसान इस तरह करें धान की फसल में लगने वाले खरपतवारों का सफाया

धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण

इस वर्ष मानसूनी वर्षा की अनियमितता के कारण किसानों को धान की रोपाई में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। देश के कई राज्यों में अभी धान की रोपाई अंतिम चरण में है, जहाँ पर धान की बुआई पहले हो चुकी है, वहाँ पर खरपतवार भी लगने लगी है, जिसका सीधा असर धान के उत्पादन पर पड़ता है। धान की फसल में खरपतवार एक बहुत बड़ी समस्या है यदि समय पर इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल को बहुत अधिक नुक़सान होता है।

खरपतवार पैदावार में कमी के साथ धान में लगने वाले रोग के कारकों एवं कीटों को भी आश्रय देते हैं। धान की फसल में खरपतवार के कारण 15-85 प्रतिशत तक नुकसान होता है, कभी-कभी यह नुकसान 100 प्रतिशत तक भी पहुँच जाता है, इसलिए सही समय पर खरपतवार नियंत्रण करना बहुत आवश्यक है। किसान धान में लगने वाले खरपतवारों का नियंत्रण इस प्रकार कर सकते हैं।

धान की फसल में करें निंदाई-गुड़ाई 

सामान्यत: धान फसल में दो निकाई–गुडाई की आवश्यकता पड़ती है। पहली निकाई – गुडाई, बुआई अथवा रोपनी के 20-25 दिन बाद तथा दूसरी 40-45 दिन बाद करके खरपतवारों का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। फसल एवं खरपतवार की प्रतिस्पर्धा के क्रांतिक समय में मजदूरों की कमी या असामान्य मौसम के कारण कभी-कभी खेत में अधिक नमी हो जाने के फलस्वरूप निंदाई-गुड़ाई सम्भव नहीं हो पाती है, जिस कारण किसान भाई अनुशंसित रासायनिक खरपतवारनाशी का उपयोग धान में कर सकते हैं। 

यह भी पढ़ें   किसानों को यूरिया पर दी जा रही है 10 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी: प्रधानमंत्री मोदी

किसान इन खरपतवारनाशी दवाओं से कर सकते हैं नियंत्रण

  • पेंडीमेथिलीन 30%EC – यह खरपतवार प्री–इमरजेन्स (खर–पतवार उगने के पूर्व) प्रकृति का है, इसकी 3.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से बुआई के 3–5 दिनों के अंदर 600 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
  • बूटाक्लोर 50% EC – रोपनी के 2 से 3 दिनों (72 घंटे) के अंदर 2.5 लीटर 600–700 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए अथवा 50 – 60 किलोग्राम सूखे बालू में मिलाकर भुरकाव किया जा सकता है | भुरकाव के समय खेत में हल्का पानी लगा रहना आवश्यक है।
  • प्रेटिलाक्लोर 50% EC – रोपनी के 2 से 3 दिनों के अंदर 1 से 1.5 लीटर की मात्रा को 600 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करना चाहिए |
  • आँक्सीफ्लोरफेन 23.5% EC – 650 से 1000 मि.ली. प्रति हे. की दर से छिडकाव किया जा सकता है | जीरोटिलेज या सीड ड्रील विधि से सीधी बुआई में उसे 3 से 5 दिनों के अंदर व्यवहार करना चाहिए |
  • पाइराजोसल्फूराँन ईथाइल 10%WP – इस खरपतवारनाशी का 100 से 150 ग्राम प्रति हे. की दर से रोपनी के 8 से 10 दिन के अंदर 600 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव या 50 से 60 किलोग्राम सूखे बालू में मिलाकर व्यवहार किया जाना चाहिए|
  • विस्पाइरी बैक सोडियम 10% SL – यह खरपतवारनाशी पोस्ट ईमरजेन्स (खरपतवार उगने के पश्चात्) प्रकृति का है | इसका व्यवहार 250 मि.ली. प्रति हे. की दर से बुआई या रोपनी 15 से 20 दिनों के अंदर 700 से 800 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर में मिलाकर छिडकाव किया जाना चाहिए |
यह भी पढ़ें   29 से 31 जलाई के दौरान बिहार एवं झारखंड राज्य के इन जिलों में हो सकती है भारी बारिश

खरपतवारनाशी रसायनों के उपयोग में सावधानियां 

खरपतवार नियंत्रण के लिए उपयोग में लिए जाने वाले रासायनिक दवाईयों के उपयोग में किसानों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की जरूरत है| जो इस प्रकार है :-

  • रसायनों की अनुशंसित मात्रा का ही उपयोग किसानों को करना चाहिए।
  • खरपतवारनाशी रसायनों का प्रयोग करते समय भूमि में पर्याप्त नमी होनी चाहिए।
  • छिडकाव सदैव हवा शांत रहने तथा साफ़ मौसम में करना चाहिए।
  • खरपतवारनाशी रसायनों के छिड़काव के लिए फ्लैट फैन/फ्लड जेट नोजल का ही उपयोग किया जाना चाहिए।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
यहाँ आपका नाम लिखें

ताजा खबरें

डाउनलोड एप