किसान इस तरह करें गेहूं की फसल में चौड़ी एवं संकरी पत्ती वाले खरपतवारों का नियंत्रण

गेहूं में चौड़ी एवं संकरी पत्ती वाले खरपतवारों का नियंत्रण

देश के अलग-अलग राज्यों में रबी मौसम की फसलों की बुआई का काम चल रहा है, इस सीजन की सबसे मुख्य फसल गेहूं है | धान के बाद देश में सबसे अधिक क्षेत्र में इसकी खेती तथा उत्पदान होता है | गेहूं की खेती में अच्छी पैदवार प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि समय पर इसमें लगने वाली खरपतवार का नियंत्रण किया जाए |

गेहूं की फसल में मुख्यतः दो तरह के खरपतवार लगते हैं एक तो सकती पत्ती वाले एवं दुसरे चौड़ी पत्ती वाले | गेहूं में लगने वाले मुख्य खरपतवार जैसे-मोथा, बथुआ, गुल्ली डंडा, खरतुवा, हिरनखुरी कृष्णनील आदि खरपतवारों का नियंत्रण रसायनों द्वारा किया जा सकता है | किसानों को शाकनाशी रसायनों का उपयोग करते समय यह ध्यान देना होगा कि उनकी उचित सांद्रता को विधि पूर्वक समय पर प्रयोग करने से समुचित लाभ होता है |

इस तरह करें सकरी पत्ती वाली खरपतवारों का नियंत्रण

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गेहूं में संकरी पत्ती वाले खरपतवार में अधिकांशतः जंगली जई, गुल्ली डंडा आता है | इस प्रकार के खरपतवार की रोकथाम के लिए पैंडीमिथिलिन 30 प्रतिशत या आइसोप्रोट्यूराँन 75 प्रतिशत से कर सकते हैं | इसका प्रयोग बुवाई के 30 से 35 दिन के बाद गेहूं के खेत में 600 से 700 लीटर पानी में पैंडीमिथिलिन 30 प्रतिशत की मात्रा 3.5 लीटर प्रति हेक्टेयर या आइसोप्रोट्यूराँन 75 प्रतिशत 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर कि दर से करना चाहिए|

इस तरह करें चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों का नियंत्रण

गेहूं की फसल में अधिकांशतः चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार जैसे बथुआ, सेंजी, कृष्णनील, हिरनखुरी, चटरी-मटरी, अकरा-अकरी, जंगली गाजर, ज्याजी, खरतुआ, सत्याशी आदि पाई जाती हैं | किसान इनकी रोकथाम के लिए 2,4 डी (सोडियम लवण 80 प्रतिशत)शाकनाशी के छिड़काव कर रोकथाम कर सकते हैं | इसका उपयोग किसानों को बुवाई के 30 से 35 दिन बाद 600 से 700 लीटर पानी में 650 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से करना चाहिए |

संकरी एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों का नियंत्रण

यदि गेहूं की फसल में दोनों तरह की खरपतवार संकरी एवं चौड़ी पत्ती वाली (जंगली जई, गुल्ली डंडा, हिरनखुरी, बथुआ, वन गाजर) लग गई है, तो किसान भाई उसके नियंत्रण के लिए आइसोगार्ड प्लस या 2,4 डी 1.25 कि.ग्रा., एस्टर 750 ग्राम या आइसोप्रोट्यूराँन 75 प्रतिशत 1.0 कि.ग्रा की दर से बुआई के 30-35 दिनों बाद 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हैक्टर की दर से छिडकाव करना चाहिए |

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