अधिक पैदावार के लिए केले की खेती करने वाले किसान हर महीने करें यह काम

केले की खेती में महीने के अनुसार यह काम करें किसान

पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण केले की मांग देश एवं दुनिया में बढ़ी है, जिससे देश के कई राज्यों के किसान केला उत्पादन का कार्य कर रहे हैं | देश के कई राज्यों में किसानों के लिए यह महत्वपूर्ण फसल है | केले की खेती साल भर चलती है, पिछले कुछ वर्षों से केले के पेड़ों पर विभिन्न प्रकार के रोग तथा कीट लगने लगे हैं| जिसके कारण फसल तथा उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं | केले की खेती का क्षेत्रफल बढ़ने के साथ ही इसमें कई नई चुनौतियाँ भी सामने आई है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है | ऐसे में केला उत्पादक किसानों को वैज्ञानिक तरीक़ों से खेती कर अधिक लाभ लेना चाहिए |

किसानों को केले की अधिक पैदावार के लिए उसके क्षेत्र के अनुसार अनुशंसित प्रजाति का चयन ही करना चाहिए, साथ ही रोपाई के लिए जो भी आवश्यक सामग्री है वह पौध सामग्री किसी विश्वसनीय स्त्रोत से ही लेना चाहिए | इसके अलावा पौध सामग्री उपचारित करके ही अनुशंसित समय एवं दूरी पर रोपाई करना चाहिए | किसान समाधान केले की रोपाई के बाद प्रतिमाह केला किसान क्या करें इसकी जानकारी लेकर आया है :-

प्रथम माह में यह करें केला किसान

  • पौध लगाने के बाद इसके चारों तरफ की मिट्टी अच्छी तरह से दबा दें, जिससे अच्छा एवं शीघ्र विकास हो |
  • बिना अंकुरित या सड़े हुए सकर्स की जगह गैप फिलिंग की प्रक्रिया कर प्रति इकाई पौध संख्या सुनिश्चित कर लें |
  • हरी खाद के लिए लोबिया या ढैंचा के बीच की बुआई इस की शुरुआत में करें |
  • अतिरिक्त आय के लिए कम अवधि वाली फसलें जैसे मूंग, उड़द एवं सब्जियों की खेती अंत: फसल के रूप में ले सकते हैं | यह ध्यान रहे कि टमाटर, मिर्च एवं क्द्दुवर्गीय फसलें अंत: फसल के रूप में न लें |

दिव्तीय माह में यह करें केला किसान

  • खरपतवार नियंत्रण के लिए दो पंक्तियों के बीच गुडाई करें एवं मिट्टी चढा दें |
  • फ्यूजेरियम विल्ट (उकठा) रोग से बचने के लिए सुरक्षात्मक छिड़काव के रूप में 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति लीटर पानी की दर से छिडकाव इस प्रकार करें कि पौध के साथ–साथ जड़ के पास मिट्टी में भी फफुन्द्नाश्क पहुँच जाए |
  • 30 ग्राम ट्राईकोडर्मा विरिडी 1 किलोग्राम कम्पोस्ट या एफवाईएम में मिलाकर पौधों के चारों तरफ मिट्टी में मिला दें | जिससे उकठा की समस्या को रोका जा सके |
  • रोपाई के 30 दिनों के बाद 60 ग्राम यूरिया प्रति पौधा की दर से पौधों के चारों तरफ मिट्टी में मिला दें |

तीसरे महीने में यह काम करें केला किसान

  • यदि सूत्रकृमि की समस्या दिखाई पड़े तो 20–25 ग्राम कार्बोफ्यूरान प्रति पौधे की दर से पौधे के चारों तरफ मिट्टी में मिला दें |
  • खेत की हल्की गुडाई कर खरपतवार का नियंत्रण करते रहें |
  • उर्वरक की दूसरी खुराक रोपाई के 75 दिनों बाद दें, जिसमें यूरिया 60 ग्राम + सुपर फास्फेट 125 ग्राम + सूक्ष्म पोषक तत्व 25 ग्राम + मैग्नीशियम सल्फेट 25 ग्राम प्रति पौधा उपयोग करें |

चौथे महीने में यह काम करें केला किसान

  • फास्फोबैक्टोरिया 30 ग्राम+ट्राईकोडर्मा विरिडी 30 ग्राम 5 किलोग्राम एफवाईएम के साथ मिलाकर प्रति पौधा प्रयोग करें | यह ध्यान रहे कि कम से कम दो सप्ताह का अंतराल रासायनिक खाद एवं जैव उर्वरक के बीच होना चाहिए |
  • 30 से 40 दिनों के अंतराल पर मातृ पौधे के आस–पास उग रहे सकर्स की कटाई सामान्य रूप से करते रहें | कटे भाग के मध्य पर 2–3 मि.ली. केरोसिन तेल डाल दें |
  • खेत का निरिक्षण करते रहें, यदि एक भी पौधा विषाणु से ग्रसित दिखाई पड़ता है, तो उसे अविलंब उखाड़कर नष्ट कर दें एवं कीटनाशक का छिडकाव कर रोगवाहक कीट को नियंत्रित करें |
  • फफूंदजनित और सिगाटोका रोग की समस्या से बचने के लिए पहला छिडकाव रोपाई के 120–125 दिनों बाद करें | जिसमें कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें |

पांचवे महीने में यह काम करें केला किसान 

  • रोपाई के 125 दिनों बाद उर्वरक की तीसरी खुराक में यूरिया 60 ग्राम + सुपर फास्फेट 125 ग्राम प्रति पौधा प्रयोग करें |
  • सूखी एवं ग्रसित पत्तियों को निकालकर जला दें या नष्ट कर दें |
  • खुदाई एवं खरपतवार की सफाई सामान्य रूप से करते रहें |
  • सिगाटोका रोग की समस्या से बचने के लिए दूसरा छिडकाव रोपाई के 150 दिनों के बाद करें, जिसमें प्रोपिकोनाजोल 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें |

छठवें महीने में क्या करें केला किसान

  • गुडाई कर पौधों पर मिट्टी चढ़ा दें | 
  • सूखी एवं ग्रसित पत्तियों को निकालकर जला दें या नष्ट करने की प्रक्रिया करते रहें |
  • रोपाई के 165 दिनों बाद उर्वरक की चौथी खुराक में 60 ग्राम यूरिया + 100 ग्राम पोटाश प्रति पौधा प्रयोग करें |
  • पीली पड़ रही पत्तियां लौह की कमी का लक्षण है | इसी कमी को दूर करने के लिए 0.5 प्रतिशत फेरस सल्फेट + 1 प्रतिशत यूरिया के साथ चिपकने वाले पदार्थ का घोल बनाकर छिडकाव करें |
  • जिंक की कमी को पूरा करने के लिए 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट + वेंटिंग एजेंट के घोल का छिड़काव करें | बोरान की कमी को पूरा करने के लिए 0.5 प्रतिशत बोरेक्स का छिडकाव करें |
  • सिंगाटोका रोग की समस्या से बचने के लिए तीसरा छिड़काव रोपाई के 175 दिनों बाद करें | इसमें क्म्पेनियम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी मिलाकर छिड़काव करें |

सातवें महीने में क्या करें केला किसान

  • रोपाई के 210 दिनों बाद उर्वरक की पांचवी खुराक में यूरिया 60 ग्राम प्रति पौधा प्रयोग करें |
  • सूखी पत्तियों की सफाई करते रहें एवं सिगाटोका रोग की समस्या से बचाव के लिए चौथा छिड़काव रोपाई के 200 दिनों बाद करें | इसमें ट्राइडमार्फ़ 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें |
  • मातृ पौधे के पास उग रहे सकर्स की कटाई की प्रक्रिया 25 से 30 दिनों के अंतराल पर करते रहें |

आठवें महीने में क्या करें केला किसान

  • फूल आने के बाद केवल एक स्वस्थ सकर्स को छोड़कर बाकी सभी सकर्स को पहले रैटून फसल के रूप में बढने दें 
  • गहर (घौद) में फल पूर्ण रूप से लग जाने के बाद अग्र भाग यानी नर पुष्प को काटकर अलग कर दें |
  • 20 ग्राम पोटेशियम सल्फेट प्रति लीटर पानी में घोलकर गहर (घौद) पर अच्छी तरह से छिड़काव करें, ऐसा करने से फलों की बढवार एवं गुणवत्ता अच्छी होगी |
  • सिगाटोका रोग की समस्या से बचने के लिए पांचवा छिड़काव रोपाई के 230 दिनों बाद करें, जिसमें प्रोपीकोनाजोल 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें |

नवें महीने में क्या करें केला किसान

  • रोपाई के 255 दिनों बाद उर्वरक की छठी खुराक में यूरिया 60 ग्राम एवं 100 ग्राम पोटाश प्रति पौधा डालें |
  • पोटेशियम सल्फेट का दूसरा छिड़काव पहले छिड़काव के 30 दिनों बाद करें |
  • केले की खेती को तेज हवा से बचाने के लिए दो बांसों को आपस में बांधकर कैंची की तरह फलों के गुच्छों के बीच से लगाकर सहारा देते हैं |
  • सिगाटोका रोग की समस्या से बचने के लिए छठा छिड़काव रोपाई के 250 दिनों बाद करें, जिसमें कम्पेनियां 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें |
  • पौधों में गहर (घौद) आ जाने पर वे एक तरफ झुक जाते हैं | यदि उनका झुकाव पूर्व या दक्षिण की तरफ होता है, तो फल तेज धुप से खराब हो जाते हैं | अत: केले के अयन को पौधे की ऊपर वाली पत्तियों से ढक देना चाहिए |
  • अयन (घड) में कुछ अपूर्ण हत्थे होते है, जो गुणवत्तायुक्त फल उत्पादन में बाधक होते हैं | ऐसे अपूर्ण हत्थों को अयन से अविलंब काटकर हटा देना चाहिए |

दसवें महीने में क्या करें केला किसान

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रोपाई के 300 दिनों बाद उर्वरक की सातवीं खुराक में यूरिया 60 ग्राम एवं पोटाश 100 ग्राम प्रति पौधा उपयोग करें |

 

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