फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के लिए मिल रही है 80 प्रतिशत तक सब्सीडी

0
1790
views

फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के लिए मिल रही है 80 प्रतिशत तक सब्सीडी

सरकार फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के लिए 50-80 प्रतिशत की दर से सब्सिडी मुहैया करा रही है। इन मशीनों से फसल अवशेष को मिट्टी के साथ मिश्रित करने में किसानों को मदद मिलती है, जिससे इसे और ज्‍यादा उत्‍पादक बनाना संभव हो पाता है। किसान समूहों को विशिष्‍ट जरूरतों के अनुसार फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की सहायता लेने हेतु कृषि मशीनरी बैंकों की स्‍थापना करने के लिए परियोजना लागत के 80 प्रतिशत की दर से वित्तीय मदद मुहैया कराई जा रही है। इस योजना के तहत पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और एनसीआर हेतु दो वर्षों के लिए 1151.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने कहा है कि भारत में लाखों टन अपशिष्‍ट कृषि एवं इससे जुड़े उद्यम उत्‍पन्‍न करते हैं। आंकड़ों के अनुसार, 70 प्रतिशत अपशिष्‍ट का उपयोग औद्योगिक क्षेत्र में होने के साथ-साथ घरेलू ईंधन के रूप में भी होता है। शेष अपशिष्‍ट को जैव-अवयवों एवं जैव-ईंधनों में तब्‍दील किया जा सकता है और इसका उपयोग ऊर्जा उत्‍पादन में भी किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें   राजस्थान में होगी देश की अब तक की सबसे बड़ी कर्ज माफी

कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय और भारतीय हरित ऊर्जा संघ (आईएफजीई) द्वारा आज ‘ऊर्जा उत्‍पादन में अपशिष्‍ट की संभावनाएं एवं इसकी चुनौतियां’ विषय पर आयोजित किए गए राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए उन्‍होंने फसल अवशेषों या पराली को जलाने से उत्‍पन्‍न होने वाले प्रदूषण को समाप्‍त करने की जरूरत पर विशेष बल दिया। उन्‍होंने कहा कि पराली को जलाने से उत्‍पन्‍न होने वाली जहरीली गैसें मानव स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अत्‍यंत नुकसानदेह हैं और इनसे मिट्टी के पोषक तत्‍वों का नाश होता है।

होती है प्रति हेक्‍टेयर 2000 रुपये की बचत

खेत में फसल अवशेषों के प्रबंधन से मिट्टी को और भी अधिक उर्वर बनाने में मदद मिलेगी जिससे किसानों की उर्वरक लागत में प्रति हेक्‍टेयर 2000 रुपये की बचत होगी। फसल अवशेष से पटिया (पैलेट) बनाकर इसका इस्‍तेमाल विद्युत उत्‍पादन में किया जा सकता है। कृषि यंत्रीकरण से जुड़े उप-मिशन के तहत पुआल रेक, पुआल की गठरी, लोडर, इत्‍यादि पर 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। इसके जरिए फसल अवशेष को संग्रहीत किया जाता है और इससे गांठें बनाई जाती हैं, ताकि फसल अवशेष की पटिया (पैलेट) को विद्युत उत्‍पादन संयंत्रों तक पहुंचाने में आसानी हो सके।

यह भी पढ़ें   अयोध्या नहीं कर्ज माफ़ी चाहिए: किसान मुक्ति मार्च

कृषि यंत्रीकरण उपमिशन योजना के विषय में जानने के लिए क्लिक करें 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here