सोयाबीन की फसल में इस समय लगने वाले इन कीट-रोगों का नियंत्रण इस तरह करें

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सोयाबीन की फसल में कीट-रोग

इस समय सोयाबीन की फसल में फूल आने की शुरूआत हो चुकी है | कुछ राज्यों में अगेती बुवाई वाली सोयाबीन में फल लगना भी शुरू हो गए है | इसके साथ ही फसलों पर इल्लियों के साथ–साथ चूहों एवं अन्य कीट-रोगों का प्रकोप भी बढ़ने लगा है | सोयाबीन की फसल को नुकसान से बचाने के लिए जरुरी है कि किसान समय पर कीट-रोगों की पहचान कर उनका नियंत्रण करें | किसानों को सोयाबीन की फसल में इस समय पर लगने वाले कीट-रोगों से बचाव के लिए यह कार्य करना चाहिए:-

सोयाबीन की फसल में लगने वाले फफूंदजनित रोग का नियंत्रण

एथ्राक्नोज तथा रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट जैसे फफुन्द्जनित रोगों के नियंत्रण हेतु किसानों को टेबूकोनाजोल (625 मिली/हे.) या टेबूकोनाजोल+सल्फर (1 किलोग्राम/हे.) या पायराक्लोस्ट्रोबीन 20 डब्लू.जी. (500 ग्राम/हे.) या पायराक्लोस्ट्रोबीन + इपोक्सीकोनाजोल (750 मिली/हे.) या फ्लुक्सापायरोक्साड + पायराक्लोस्ट्रोबिन 350 ग्राम प्रति हेक्टेयर का छिडकाव करना चाहिए |

पीला मोजेक रोग का नियंत्रण कैसे करें ?

पीला मोजेक वायरस व सोयाबीन मोजेक वायरस जैसे विषाणु जनित रोगों के नियंत्रण हेतु किसानों को प्रारंभिक अवस्था में ही ग्रसित पौधों को उखाड़कर तुरंत खेत से निष्काषित कर देना चाहिए तथा सफेद मक्खी व एफिड जैसे रस चूसने वाले रोग वाहक कीटों के नियंत्रण हेतु अपने खेत में विभिन्न स्थानों पर पिला स्टिकी ट्रैप लगाएं | यह भी सलाह हैं कि रोग – वाहकों की रोकथाम हेतु अनुशंसित पुर्वमिश्रित कीटनाशक थायोमिथोक्सम + लैम्बडा सायहेलोथ्रिन (125 मिली/हे.) या बीटासायफ्लुथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली./हे.) का छिड़काव करें | (इन दवाओं के छिड़काव से तना मक्खी का भी नियंत्रण किया जा सकता है)

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चक्र भृंग का नियंत्रण कैसे करें ?

चक्र भृंग के नियंत्रण हेतु थायक्लोप्रिड 21.7 एस.सी. 750 मिली./हे. या प्रोफेनोफाँस 50 ई.सी. (1250 मि.ली./हे.) या इमामेक्टीन बेन्जोयेट (425 मिली./हे.) का 500 लीटर पानी के साथ 1 हेक्टेयर में छिड़काव करें | इसके साथ ही ग्रसित पौधे को तोड़कर फेक दें |

पत्ती खाने वाली इल्लियों को नियंत्रण कैसे करें ?

चक्र भृंग तथा पत्ती खाने वाली इल्लियों के एक साथ नियंत्रण हेतु पूर्वमिश्रित कीटनाशक नोवाल्युरौन + इंडोक्साकार्ब (850 मिली./हे.) या बीटासायफ्लूथ्रिन (125 मिली./हे) का छिड़काव करें | इनके छिडकाव से तना मक्खी का भी नियंत्रण किया जा सकता है |

चने की इल्ली का नियंत्रण कैसे करें ?

जहाँ पर केवल चने के इल्ली (हेलिकोवेर्पा अर्मिजेरा) का प्रकोप हो, इसके नियंत्रण के लिए फेरोमेन ट्रैप (हेलिल्युर) लगाये तथा अनुसंशित कीटनाशक लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 4.90 सी.एस. (300 मिली./हे.) या इंडोक्साकार्ब 15.8 ई.सी. (333 मिली./हे.) या फ्लूबेंडियामाइड 39.35 एस.सी. (150 मिली/हे.) या इमामेकटीन बेंजोएट (425 मिली.हे.) का छिड़काव करें |

चना मक्खी का नियंत्रण कैसे करें ?

जिन क्षेत्रों में तना मक्खी का प्रकोप हो, इसके नियंत्रण हेतु पुर्वमिश्रित बीटासायफ्लुथ्रिन + एमिडाक्लोप्रिड (350 मिली./हे.) या थायमिथोकसम + लैम्बाडा सायहेलोथ्रिन (125 मिली/हे.) का छिडकाव करें |

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चूहे का नियंत्रण कैसे करें ?

सोयाबीन की शीघ्र पकने वाली किस्में (जे.एस. 95 – 60, जे.एस. 20 – 34 आदि) अभी फलियों में दाने भरने की स्थिति में हैं | इसमें कई जगहों पर सोयाबीन की फलियां टूटकर / कटकर गिर रही हैं | अगर ऐसा हैं तो यह चूहे के काटने से हो सकता है | इसके लिए सोयाबीन की खेत में चूहे की रोकथाम करें | चूहे की रोकथाम के लिए बिस्किट या रोटी में जिंक फास्फाइड मिले आटे की गोलियों को खेत के मेड / चूहों के बील के पास रखें |

सोयाबीन के फूल-फल खाने वाली इल्ली का नियंत्रण कैसे करें ?

फूल लगने की अवस्था में इल्लियों द्वारा फूलों के खाने से अफलन की स्थिति से बचाने हेतु सलाह है की लैम्बडा सायहलोथ्रिन 4.90 सी.एस. (300 मिली./हे.) या इंडोक्साकार्ब 15.8 ई.सी. (333 मिली./हे.) या फ्लूबेंडियामाइड 39.35 एस.सी. (150 मिली/हे.) या स्पायनेटोरम 11.7 एस.सी. 450 मि.ली. या कलोरएन्ट्राईनिलिप्रोल 18.5 एस.सी. (150 मिली./हे.) क छिडकाव करें |

सफेद सूंडी का नियंत्रण कैसे करें ?

कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल में सफेद सुंडी (वाइट ग्रब) का प्रकोप देखा गया है | उसके नियंत्रण हेतु सलाह है कि कलोरपायरिफाँस (2.5% दानेदार) दवा को 16 किलोग्राम/हैक्टेयर की दर से सोयाबीन की कतारों के बीच बिखेरें |

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    • सर जिंक की कमी से हो सकता है | आप फोटो भेंजें 9098298238 पर या फेसबुक पेज पर |

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