अच्छी नस्ल के सभी प्रकार के पशु खरीदने के लिए आयें एशिया के सबसे बड़े पशु मेले में

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pashu kharidne ke sonpur mela 2019

एशिया का सबसे बड़ा सोनपुर पशु मेला 2019

पशुपालन करना चाहते हैं तो आप के ध्यान में एक बात सबसे पहले आती है कि अच्छे नस्ल के पशु कहाँ मिलेंगे उनके क्या दाम होंगे | अगर डेयरी के लिए पशु की आवश्यकता होती है तो सबसे पहले मन में यही खयाल आता है की सबसे अच्छी नस्ल का पशु कौन सा है एवं कहाँ मिलेगा | वही बात बकरी, सूअर, भेड़  पलना चाहते हैं तो कम समय में अधिक वृद्धि होने वाले नस्ल के पशु कहाँ मिलेगा |

बहुत कम जगह होती है कि जहाँ एक ही समय में एक ही स्थान पर सभी तरह के तहत अलग–अलग नस्ल के पशु आप देख परख कर खरीद सकें | आज हम आपको ऐसे ही एक मेले के बारे में बताएँगे इस मेले से आप सभी तरह के पशु खरीद भी सकते हैं एवं उनकी जांच परख भी कर सकते हैं |

एक ऐसा मेला भारत में पशुओं का लगता है  जहां पर सभी तरह के पशु आप को एक ही जगह पर मिल जाएंगे | सभी तरह के पशु का मतलब यह हुआ कि हाथी, घोडा, कुत्ता, गाय, भैंस, बकरी, भेड़,के अलावा जो भी जानवर खरीदना या देखना चाहते हैं वह सभी मिलेंगे |

सोनपुर पशु मेला की पूरी जानकारी

पटना से लगभग 25 किलोमीटर दूर गंगा नदी के पार करने के बाद ही एशिया का सबसे बड़ा तथा कुम्भ से भी बड़ा मेला बिहार में लगता है जिसका नाम है सोनपुर पशु मेला | सोनपुर मेला वैशाली जिले के हाजीपुर से तीन किलोमीटर की दुरी पर है | सोनपुर मेला को हरिहर मेला या छतर मेला भी कहते हैं | यह मेला कार्तिक पूर्णिमा पर लगता है यानि नवम्बर से दिसम्बर तक मेला लगता है | यह मेला एक माह तक चलता है | इस बार 10 नवम्बर से शुरू हो चूका है जो दिसम्बर की 10 तारीख तक चलेगा |

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सोनपुर मेला के शुरू होने की कहानी क्या है ?

जैसा की हर तीर्थ मेला या धार्मिक स्थान का एक पौराणिक कहानी होता है वैसा ही इस मेले का एक कहानी प्रसद्धि है |

“ऐसा बताया जाता है कि भगवान विष्णु के दो अनन्य भक्त जय और विजय शापित होकर धरती पर पैदा हुये | उनमें से एक ग्राह यानि की मगरमच्छ बना और दूसरा गज यानि हाथी बना | एक दिन गज जब नदी में पानी पीने गया तो ग्राह (मगरमच्छ) ने उसे पकड़ लिया और काफी मेहनत के बाद भी गज मगरमच्छ से छुटकाडा नहीं पा रहा था |

बताया जाता है कि दोनों कि लडाई कई वर्षों तक चली और इसके बाद गज ने भगवान विष्णु का अहव्ना किया तो भगवान ने सुदर्शन चक्र छोड़ा और ग्राह की मौत हो गई और गज मुक्त हुआ | इसके बाद कई सारे तेवता इस जगह उसी समय प्रगट हुये और उन्होंने भगवान विष्णु के साथ – साथ गज का भी जयकार लगाया | इसके ब्रम्हा ने यहाँ पर भगवान शिव और विष्णु दोनों की मूर्ति लगाई और इसे नाम दिया हरिहर |

भारत वर्ष एक मात्र यह स्थान है जहाँ पर भगवान शिव और विष्णु की मूर्ति एक साथ रखी गई है | गज की इस जीत को याद करने के लिए हर साल यहाँ उत्सव होने लगा और आज यह मेला के रूप में जाना जाता है | ऐसा बताया जाता है कि यहाँ भगवान राम भी यहाँ आये थे और उन्होंने हरिहर की पूजा की थी |

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ऐसी मान्यता है कि यहाँ पर भगवान बद्ध , गुरु नानक देव भी यहाँ आ चुके हैं | चन्द्रगुप्त मौर्य ने यहाँ से ही हाथी खरीदा था तथा वीर कुवंर सिंह भी यहाँ से घोडा तथा हथिन खरीदा था |

सोनपुर पशु मेला कि खास बात क्या है ?

 यह मेला कार्तिक माह में लगता है जो अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नवम्बर – दिसम्बर में होता है | यह मेला 5 से 6 किलोमीटर के बड़े क्षेत्रफल में लगाया जाता है | यह मेला पशुओं के लिए प्रसद्धि हैं यहाँ पर हर तरह के छोटे – बड़े पशु मिल जाते है | इसके अलावा यहाँ पर घोड़े , ऊंट तथा हांथी की दौड़ (रेस) लगाई जाती है | यहाँ पर गज का स्नान भी होता है जिसे देखने के लिए लाखों लोग आते हैं |

इसके अलवा यहाँ पर मनोरंजन के लिए थियेटर प्रसिद्ध है | आनेवाले पर्यटक के लिए विशेष व्यवस्था रहती है जहाँ रुकने की व्यवस्था के साथ मेले में हर तरह के व्यंजन उपलब्ध रहता है | जिसका लुफ्त आनेवाले लोग उठाते हैं | 

किसान यहाँ क्यों जायें ?

किसान इस प्राचीन तथा धार्मिक जगह के घुमने के लिए जा सकते हैं | सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अच्छे नस्ल के पशु खरीदना चाहते हैं तो सोनपुर मेला में जरुर जायें | यहाँ पर हर तरह के पशु मिलेगा तथा आप अपनी पसंद के पशु देखकर और उसे सही कीमत पर खरीद सकते हैं |

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