मुख्यमंत्री ने किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए किया कृषि सलाहकार परिषद का गठन

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कृषि सलाहकार परिषद का गठन

किसान तथा किसान संगठनों के द्वारा उठाए जा रहे मुद्दे तथा उनकी मांगों और सुझावों पर विचार करने के लिए एक कृषि सलाहकार परिषद का गठन किया गया है | कृषि सलाहकर परिषद किसानों की समस्याओं का समाधान निकालेगी | यह परिषद् मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ की अध्यक्षता में गठित की गई है | परिषद में सरकारी नौकर शाह के साथ–साथ कैबिनेट मंत्री और किसान से जुड़े प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है |

यह कृषि विकास परिषद मध्य प्रदेश के लिए हैं तथा इसका अध्यक्ष मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री कमलनाथ है | इस परिषद का उपाध्यक्ष किसान–कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री परिषद उपाध्यक्ष होंगे तथा प्रमुख सचिव किसान–कल्याण एवं कृषि विकास को परिषद का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है | कृषि सलाहकर परिषद का कार्यकाल 5 वर्ष का होगा | पांच वर्ष बाद नये सदस्यों के साथ परिषद का पुनर्गठन किया जायेगा |

कृषि सलाहकर परिषद की रुपरेखा इस प्रकार है 

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार परिषद में 20 सदस्य मनोनीत किये गये हैं | मनोनीत सदस्यों में मुख्य सचिव, कृषि उत्पादन आयुक्त, प्रमुख सचिव किसान – कल्याण तथा कृषि विकास, प्रमुख सचिव उधानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी, प्रमुख सचिव पशुपालन, प्रमुख सचिव मछुआ कल्याण तथा मत्स्य – पालन , प्रमुख सचिव खाध – नागरिक आपूर्ति एवं उपभोगता संरक्षण, राजमाता विजयाराजे सिंधिया विश्वविध्यालय, ग्वालियर के वाइस चांसलर श्री एस.आर.राव और राज्य कृषि विपन्न संघ, राज्य सहकारी संघ, राज्य सहकारी विपन्न संघ के प्रबंध संचालक और संचालक किसान – कल्याण तथा कृषि विकास, संचालक उधानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी एवं संचालक कृषि अभियांत्रिक शामिल हैं |

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इसके अलवा परिषद में 7 अशासकीय सदस्य मनोनीत किये गये हैं | इन सदस्यों के नाम श्री दिनेश गुर्जर (मुरैना), श्री शिवकुमार शर्मा (होशंगाबाद), श्री उमराव सिंह गुर्जर (नीमच),श्री केदार सिरोही (हरदा), श्री विश्वनाथ ओक्टे (छिंदवाडा), श्री ताराचंद पाटीदार (रतलाम) और श्री बृजबिहारी पटेल (जबलपुर) हैं |  

कृषि सलाहकर परिषद का कार्य इस प्रकार है

कृषि सलाहकर परिषद खेती को लाभ का धंधा बनाने तथा प्रशिक्षण की आवश्यकताओं के संबंध में किसानों के फीडबेक के आधार पर राज्य सरकार को सुझाव देगी और अनुशंसा करेगी | परिषद कृषक ऋण माफ़ी योजना की मानिटरिंग करेगी और इसके क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाईयों का फीडबेक तथा निराकरण के सुझाव देगी और अनुशंसा करेगी | परिषद के दायित्वों में केन्द्र सहायतित /राज्य सहायतित योजनाओं के क्रियान्वयन एवं उनका लाभ किसानों तक पहुँचाने के संबंध में समीक्षा करना और प्राप्त सुझावों के बाद अनुशंसा करना भी शामिल है | परिषद फसल मूल्यों, बीज की उपलब्धता , मंडी की सुविधाओं के संबंध में फीडबेक लेगी और सुझाव देगी |

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    • मध्यप्रदेश में दूसरा चरण चल रहा है | आप किस राज्य से हैं ?

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