सितम्बर माह में किसान भाई क्या-क्या कर सकते हैं

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सितम्बर माह 

कृषि

  1. धान फसल की दूसरी निराई – गुडाई करें तथा कन्से फंटने व दुग्धावस्था में 5 – 7 से.मी. पानी खेत में आवश्य रखें | बलि निकालने से पूर्व 12 किलोग्राम नत्रजन प्रति एकड़ रोपाई वाले खेत में डालें |
  2. धान में फफूंदी जनित झुलसा व शिध गलन व भूरा धब्बा रोग नियंत्रण हेतु एक किलोग्राम कार्बेडाजिम या हिनोसान (400 ग्राम दवा) 250 ली.पानी में घोल प्रति एकड़ छिड़काव करें | यदि फुदका कीट का प्रकोप दिखे मोनोक्रोटोफास 36 ई.सी. का 400 मी.ली प्रति एकड़ के हिसाब से छिडकाव करें |
  3. धान के खेत में करगा उन्मूलन का कार्य करें |
  4. मक्के की संकर किस्मों में 10 से 15 किलोग्राम नत्रजन मंजरी बनते समय करें | माह के अंत में चना व तोतिया की बोवाई करें |
  5. दलहन एवं तिलहन फसलों में खरपतवार नियंत्रण व उचित जल निकास की व्यवस्था रखें |
  6. उड़द व मूंग पिला मोजके रोग की रोकथाम हेतु डायमेथएट 30 ई.सी. 250 मि.ली. या फस्फोमिडान 85 ई.सी. 120 मि.ली. प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें |
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उद्धानिकी

  1. पपीते के पौधे के रोपने कार्य पूरा करें |
  2. बगीचे में सिंचाई नाली का निर्माण करें तथा खरपतवार नियंत्रण हेतु निंदाई – गुडाई करें |
  3. संतरा एवं बेर में सुंडी कीट नियंत्रण हेतु कीटनाशक दवा मोनोक्रोटोफास या मेलाथियान का छिडकाव करें |
  4. अदरक एवं हल्दी में सिंचाई करें |
  5. अगस्त महीने में डाली गयी नर्सरी पौध की रोपाई करें | पिछले किस्म की नर्सरी तैयार करें |
  6. महीने के अंत में अगेती आलू (कुफरी चन्द्रमुखी) की बुवाई की तैयारी करें |
  7. गोभी की अगेती फसल में गुडाई तथा निंदाई करें और 20 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ डालकर गुडाई करें |
  8. मटर व मूली की अगेती किस्मों की बुवाई महीने के अन्त में करें |

पशुपालन 

  1. गाय व भैस को टो में आने के 12 से 18 घंटे के अन्दर गाभिन करवाने का उचित समय है |
  2. दुधारू पशुओं में थैनेला रोग से बचाव के उपाय करें |
  3. पशुओं को अन्त:परजीवी नाशक दवाई पशु – चिकित्सक की सलहा अनुसार नियमित दें |
  4. बरसीम की पहली बिजाई इस माह के अन्तिम सप्ताह में शुरू करें |
  5. बरसीम की पहली काट से अधिक चारा लेने के लिए सरसों की (चाइनीज कैबीज) किस्म या जई मिलाकर बिजाई करें |
  6. बरसीम के साथ राई घास मिला कर बिजाई करने से हरे चारे की पौष्टिकता व ऊपज में वृद्धि होती है |
  7. बरसीम फसल से अधिक उपज व लम्बी अवधि तक (मध्य जून) तक हरा चारा प्राप्त करने के लिए उन्नत किस्मों BL- 10, BL- 22 व BL- 42 की बिजाई करें |
  8. बरसीम की बिजाई नये खेत में करनी हो तो बीज को राईजोबियम कल्चर से उपचारित करने पर अधिक हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है |
  9. बैल बनाने के लिए छ: मास की आयु होने पर बछड़े को बधिया करवायें |
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