पशुपालकों को किया गया 3 करोड़ 93 लाख रुपये का भुगतान

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गोबर खरीद का भुगतान

पशुपालकों और किसानों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गोधन न्याय योजना चलाई जा रही है | जिसके तहत राज्य के पशुपालकों से 2 रूपये प्रति क्विंटल कि दर से गोबर खरीदी की जाती है | इसके बाद इस गोबर से गौठानों में महिला समूह के द्वारा वर्मी कम्पोस्ट बनाकर बेचा जाता है | सरकार प्रत्येक 15 दिनों के बाद पशुपालकों से खरीदे गये गोबर तथा महिला समूहों को भुगतान किया जाता है | इसी के सन्दर्भ में छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री श्री भूपेश बघेल ने राज्य के पशुपालकों तथा गौठानों को भुगतान किया है |

किसे कितने रुपयों का भुगतान किया गया ?

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गोबर विक्रेता पशुपालकों सहित गौठान समितियों एवं महिला स्व–सहायता समूहों को लाभांश के रूप में 3 करोड़ 93 लाख रुपए की राशि ऑनलाइन अंतरित की | राज्य के गौठानों में पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीन से गोधन न्याय योजना के तहत क्रय किए गए गोबर के एवज में 2 करोड़ 63 लाख रुपए भुगतान तथा गौठान समितियों को 79 लाख और महिला समूहों को 51 लाख रूपये की लाभांश जारी करने के साथ ही “गौठान मेप एप” का भी शुभारंभ किया |

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किस अवधि का भुगतान किया गया है ?

गोधन न्याय योजना के तहत प्रत्येक 15 दिनों के बाद पशुपालकों से खरीदे गये गोबर का भुगतान किया जाता है | इस बार पशुपालकों, ग्रामीणों तथा किसानों को 1 दिसम्बर से 15 दिसम्बर तक 2 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदे गये गोबर का पैसा भेजा गया है | इसके साथ ही स्व-सहायता समूह जो गौठानों में गोबर खाद बनाती है उन्हें भी पैसा भेजा गया है |

गोधन न्याय योजना की शुरुआत 20 जुलाई 2020 को की गई थी | योजना के तहत 20 जुलाई 2020 से 15 दिसम्बर 2021 तक कुल 58.32 लाख क्विंटल गोबर खरीदी की गई थी, इसके एवज में गोबर बेचने वाले को अब तक 116.63 करोड़ रूपये का भुगतान किया गया है |

गौठानों में कितना खाद बना है ?

छत्तीसगढ़ सरकार किसानों, ग्रामीणों तथा पशुपालकों से गोबर खरीद कर जैविक खाद बनाती है | गौठान चलाने की जिम्मेदारी महिलाओं को दी गई है | महिला समूहों द्वारा गौठानों में अब तक 9 लाख 69 हजार क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तथा 4 लाख 21 हजार क्विंटल से अधिक सुपर कम्पोस्ट खाद का निमार्ण किया गया है | जिसे सोसायटी के माध्यम से बेचा जाता है | अभी तक गौठानों के महिलाओं को कुल 48 करोड़ 20 लाख रूपये की आय हो चुकी है |

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उल्लेखनीय है कि राज्य में गोधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए गावों में गौठानों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है गौठानों में पशुधन देख–रेख, उपचार एवं चारे–पानी का नि:शुल्क बेहतर प्रबंधन है | राज्य में अब तक 10,584 गावों में गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 7,836 गौठान निर्मित एवं संचालित है | जिसमें से 2,029 गौठान आज की स्थिति में स्वावलंबी हो चुकी हैं |

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