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रविवार, अप्रैल 14, 2024
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इस वर्ष 80 प्रतिशत की सब्सिडी पर स्थापित किये जाएंगे 1500 कस्टम हायरिंग सेंटर

अनुदान पर कस्टम हायरिंग सेंटर CHC हेतु लक्ष्य

आधुनिक युग में खेती किसानी के कार्यों में कृषि यंत्रों का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है, आज के समय में खेती तैयारी से लेकर कटाई तक एवं उसके बाद फसल अवशेषों के प्रबंधन तक में कृषि यंत्रों का प्रयोग बढ़ गया है | ऐसे में किसानों को कम समय एवं कम लागत में कृषि यंत्रों की आवश्यकता होती है परन्तु देश में अधिकांश किसानों की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है की एक किसान सभी तरह के कृषि यंत्र खरीद सके ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा कृषि यंत्र बैंक या कस्टम हायरिंग केंद्र खोलने के लिए किसानों को सब्सिडी दी जा रही है |  कस्टम हायरिंग केंद्र की मदद से किसान एक स्थान से सभी तरह के कृषि यंत्र किराये पर लेकर उपयोग कर सकता है | इस योजना से अधिक से अधिक किसानों को होने वाले लाभ को देखते हुए सरकार द्वारा इस योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है |

कस्टम हायरिंग केंद्र की महत्ता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) स्थापित करने के अपने वार्षिक लक्ष्य को बढ़ा दिया है | इस वर्ष 1,500 सीएचसी, जो निर्धारित लक्ष्य से लगभग दोगुने हैं, को परियोजना लागत के 80 प्रतिशत की वित्तीय सहायता के साथ स्थापित किया जाएगा | अब कस्टम हायरिंग केंद्र में फसल अवशेष प्रबंधन हेतु कृषि यंत्र भी दिए जा रहे हैं ताकि किसानों को नरवाई जलाने से रोका जा सके |

1,500 कस्टम हायरिंग केंद्र CHC स्थापित करने का लक्ष्य

हरियाणा राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री संजीव कौशल ने बताया कि पहले 820 सीएचसी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि इस बार किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए 1,500 ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएंगे। पिछले साल हरियाणा सरकार ने 1,300 सीएचसी के लक्ष्य के विरुद्ध 1,685 सीएचसी की स्थापना की थी, जोकि लक्ष्य के मुकाबले 129.61 प्रतिशत की उपलब्धि है।

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उन्होंने कहा कि सीएचसी से मशीनरी किराए पर लेने के लिए छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसे किसान कृषि यंत्रों को आसानी से उपयोग करने में सक्षम हों और वे अवशेष जलाने के विरुद्ध राज्यव्यापी अभियान में भाग लें। विभाग द्वारा पिछले साल जलने वाले फसल अवशेषों की घटनाओं के आधार पर लाल और पीले/नारंगी जोनों में प्राथमिकता के आधार पर आवंटन किया जाएगा।

बिना किसी शुल्क के दी जा रही है फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनरी

राज्य में वर्ष 2018 व 2019 के दौरान 24,705 मशीनें लगाई गई हैं, जिनमें से 8,777 मशीनें व्यक्तिगत हैं और 15,928 मशीनें 2,879 सीएचसी के साथ हैं। सरकार ने बिना किसी कीमत पर सीएचसी की स्थापना के लिए ग्राम पंचायतों को भी शामिल किया था। ग्राम पंचायतों की सहायता से सबसे कमजोर गांवों में स्थापित 851 सीएचसी छोटे और सीमांत किसानों को नि:शुल्क फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी मुहैया करा रहे हैं।

सब्सिडी पर कृषि यंत्र एवं कस्टम हायरिंग केंद्र हेतु लक्ष्य

हरियाणा सरकार ने ‘फसल के लिए कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देना’ योजना के तहत फसल अवशेष प्रबंधन उपकरणों के वितरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य का 95 प्रतिशत से अधिक हासिल किया था। इस वर्ष, राज्य सरकार ने उन सभी 11,311 व्यक्तिगत किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है, जिन्होंने वर्तमान सीजन में फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत कृषि उपकरणों के लिए आवेदन किया है, जिस पर 50 प्रतिशत की दर से लगभग 155 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।

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इस वर्ष विभाग द्वारा 454 बेलर, 5,820 सुपर सीडर, 5,418 जीरो टिल सीड ड्रिल, 2,918 चौपर्स /मल्चर्स, 260 हैप्पी सीडर, 389 स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, 64 रोटरी स्लैशर्स/श्ररब मास्टर्स, 454 रिवर्सेबल मोल्ड प्लॉवर्स और 288 रीपर लाभार्थियों को प्रदान किये जाएंगे । 21 अगस्त तक व्यक्तिगत किसानों और समितियों से कृषि उपकरणों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिनमें व्यक्तिगत श्रेणी में 2,741 के लक्ष्य के विरुद्ध 16,647 उपकरण के लिए 11,311 किसानों ने आवेदन किया है । राज्य में फसल अवशेष को जलाने से रोकने के लिए फसल अवशेष प्रबन्धन हेतु 1,304.95 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गए हैं। इस वर्ष इस योजना के तहत केन्द्र सरकार ने राज्य को 170 करोड़ रुपये प्रदान किये हैं।

किसान अधिक जानकारी के लिए यहाँ संपर्क करें 

फसल अवशेष प्रबंधन योजना से जुड़े किसी भी प्रकार कि जानकारी के लिए कृषि उप निदेशक / कृषि सहायक अभियन्ता के कार्यालय अथवा राज्य टोल फ्री नंबर 18001802117, 1800-180-1551 / 0172 – 2571553, 0172 – 2571544 पर संपर्क करें| इसके लिए अधिक जानकारी विभाग की वेबसाईट www.agriharyana.gov.in पर उपलब्ध है |

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