इस वर्ष पशुधन एवं कुक्कुट की 15 नई नस्लों का पंजीयन हुआ

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पशुधन और कुक्कुट की 15 नई देसी नस्लें

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने इस वर्ष पशुधन और कुक्कुट की रिकॉर्ड 15 देसी नस्लें 2018 को पंजीकृत किया है और अब वर्ष 2014 से लेकर वर्ष 2018 तक पंजीकृत नई नस्लों की कुल संख्या 40 हो गई है।  यह बात केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने ब्रीड रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्रों के वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कही ये देसी नस्लें गर्मी सहिष्णुता, रोग प्रतिरोध क्षमता और कम चारे पर भीउत्पादन देने के लिए प्रसिद्ध हैं। पशु नस्लों की पहचान और पंजीकरण देश की जैवविविधता से संबंधित दस्तावेजीकरण में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पशु नस्लों को उचित मूल्य प्रदान करने, उनके सुधार के लिए सरकार के विभिन्न विकास कार्यक्रमों को शुरू करने एवं देश की जैवविविधता को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। भारत में विश्व भर के कुल गोवंश का लगभग 15%, भैंस का 57%, बकरी का 17%, भेड़ का 7% औरकुक्कुट का 4.5% है। अभी भी दूरदराज के क्षेत्रों में अधिकशुद्ध रूप में अनेक नस्लों की संभावना है जिनका आने वाले समय में मूल्यांकन करनेकी आवश्यक्ता है।

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वर्ष 2010 से अब तक 55 नई पंजीकृत नस्लों में से 40 नई नस्लों को केवल चार वर्षों (2014-18)केदौरान पंजीकृत किया गया, जबकि वर्ष 2010-13 केदौरान सिर्फ 15 नई नस्लों का पंजीकरण हुआ था। उन्होंने इस बातपर खुशी जताई कि हर साल नई पंजीकृत नस्लों की संख्या बढ़ रही है।

2018 पंजीकृत नस्लें 

पंजीकृत 15 नस्लों में गोवंश की दो नस्लें (लद्दाख-जम्मू-कश्मीर से लद्दाखी, महाराष्ट्र केकोंकण क्षेत्र से कोंकण कपिला ), भैंस की तीन नस्लें (असम से लुइत, तमिलनाडुसे बरगुर, छत्तीसगढ़ से छत्तीसगढ़ी), बकरी की छह नस्लें (गुजरात से काहमी,उत्तरप्रदेश से रोहेलखण्डी, असम से असम हिल, कर्नाटक सेबिदरी और नंदीदुर्ग, जम्मू-कश्मीर से भकरवाली) और एक भेड़ (गुजरातसे पंचली), एक सुअर (उत्तर प्रदेश से घूररा),  एक गधा (गुजरात से हलारी) और एक कुक्कुट (उत्तराखंड से उत्तरा कुक्कुट) शामिल हैं।

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहनसिंह  ने कहा कि नई नस्लों की पहचान केसाथ-साथ वर्तमान नस्लों का सुधार, संवर्धन और संरक्षण भी महत्वपूर्ण है।इसके मद्देनजर देसी नस्लों के सुधार और संरक्षण के लिए विभिन्न कार्यक्रम शुरू किएगए हैं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत स्वदेशी नस्लों के सुधार और संरक्षण के लिए 2000करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई है।

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गोवंश और भैंसों की मूल नस्लों केसंरक्षण के लिए 2 राष्ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र और 20गोकुल ग्राम स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित 20भ्रूण स्थानांतरण और आईवीएफ प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जो 3000उच्च जेनेटिक गुणों वाले सांड तैयार करेंगी। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय बोवाइनजीनोमिक सेंटर कम अवधि में स्वदेशी नस्लों के दूध उत्पादन हेतु आनुवांशिक सुधारकरने के लिए सरकार की एक नई पहल है।

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