फसल अवशेष प्रबंधन की योजनाओं के लिए राज्य सरकार ने जारी किये 1,304.95 करोड़ रुपये

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crop residue management scheme

फसल अवशेष प्रबंधन के लिए योजनाएं

धान तथा गेंहूँ की फसल को हार्वेस्टर से कटाई के बाद किसानों के द्वारा खेत में आग लगा दी जाती है, जिससे वायु प्रदूषण में काफी वृद्धि होती है | दिल्ल्ली, हरियाणा  एवं पंजाब राज्य में फसल जलाने के चलते वायो प्रदुषण का स्तर काफी अधिक हो जाता है | इस समस्या को दूर करने के लिए देश भर में अलग – अलग राज्यों के द्वारा किसानों के लिए कई योजना के साथ ही दंड देने के लिए नियम भी बनाये गये हैं | कुछ राज्यों में फसल अवशेष जलाने पर किसानों को जेल तक भेजा गया है तो कुछ राज्यों में आर्थिक दंड दिया गया है | सरकार के प्रयासों के कारण फसल अवशेष जलाने में कमी आयी है |

आईसीएआर के आकड़ों के अनुसार हरियाण राज्य में वर्ष 2018 की तुलना में आग की घटनाओं वाले वास्तविक स्थानों में 68.12 प्रतिशत की तेज गिरावट आई है | 6 से 30 नवंबर 2018 के बीच राज्य में आग की घटनाओं वाले 4,122 स्थान पाए गए थे, जबकि वर्ष 2019 में इसी अवधि के दौरान एसे केवल 1,314 पाए गये हैं |

फसल अवशेष प्रवंधन के लिए वित्तीय सहायता

किसानों को फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए कई राज्यों ने विभिन्न प्रकार के योजना संचालित किया है , जिससे किसानों को आर्थिक लाभ भी मिल रहा है | इसी क्रम में हरियाणा राज्य सरकार ने राज्य के किसानों को फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दे रही है जिसे इस वर्ष भी जारी रखा गया है | इस योजना को और भी व्यापक रूप से बढ़ाया जा रहा है | इसके लिए केंद्र सरकार के तरफ से हरियाणा राज्य सरकार को वित्तीय मदद भी दी गई है  | साथ ही फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए इन-सीटू योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्र सब्सिडी पर दिये जा रहे हैं | जिसे किसान आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर के प्राप्त कर सकते हैं |

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अवशेष प्रबंधन हेतु योजनाओं का क्रियानावन

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने राज्य में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 1,304.95 करोड़ रूपये की एक व्यापक योजना स्वीकृति प्रदान की है | इस योजना का उद्देश्य राज्य में फसल अवशेषों को जलाने से रोकना है | केंद्र सरकार द्वारा इस वर्ष इस योजना के तहत राज्य को 170 करोड़ रूपये मुहैया करवाए गए हैं |

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री संजीव कौशल ने बताया कि राज्य सरकारने फसल अवशेष के इन–सीटू प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन योजना के तहत केंद्र सरकार को 639.10 करोड़ रूपये की वार्षिक योजना प्रस्तुत की है |

किसानों को दिए जाएंगे 1000 रुपये प्रति एकड़

सर्वोच न्यायालय के निर्देशों के तहत गैर–बासमती उत्पादों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सात दिनों के भीतर 1000 रूपये प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है | राज्य सरकार ने पर्याप्त मशीनों और परिचालन लागत के रूप में 1,000 रूपये प्रति एकड़ प्रदान करके, गैर–बासमती तथा बासमती की मुच्छल किस्म उगने वाले छोटे और सीमांत किसानों की मदद की है | इन दोनों उद्देश्यों के लिए राज्य सरकार द्वारा राज्य बजट में पहले ही 453 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है |

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फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना

योजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए श्री कौशल ने बताया कि राज्य सरकार फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपकरण वितरित करने, कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) स्थापित करने और कृषि एवं किसान कल्याण निदेशालय में राज्य मुख्यालय पर समर्पित नियंत्रण स्थापित करने सहित धान की पुआल के प्रबंधन के लिए हर संभव उपाय कर रही है |

हरियाणा सरकार द्वारा इन–सीटू प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए स्ट्रा बेलर इकाईयों की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया गया है | इस पहल के तहत, 5 नवंबर 2019 तक 64 ऐसी इकाइयां जबकि 6 नंबर से 11 दिसम्बर के बीच 131 इकाइयां स्थापित की गई | राज्य सरकार ने इन इकाईयों की खरीद के लिए किसानों को 155 परमिट भी जारी किए हैं |

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    • अपने जिले के कृषि विभाग या जिला कृषि विज्ञानं केंद्र से सम्पर्क करें यदि आपके पास कृषि सम्बंधित डिग्री है तो |

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