मध्यप्रदेश में कृषि आधारित आजीविका मिशन से लाखों किसान हो रहें हैं लाभान्वित, जानें कैसे

मध्यप्रदेश में कृषि आधारित आजीविका मिशन से लाखों किसान हो रहें हैं लाभान्वित, जानें कैसे

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेश के चयनित जिलों के ग्रामीण अंचलों में स्व-रोजगार के संसाधन मुहैया कराये जा रहे हैं। मिशन के अंतर्गत संचालित कृषि आधारित आजीविका गतिविधियों से 13 लाख 57 हजार 183 ग्रामीण हितग्राही लाभान्वित किये जा चुके हैं। ज्ञातव्य है कि प्रदेश के 43 जिलों के 271 विकासखण्‍डों में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सघन रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है।

कम्युनिटी मैनेज्ड संस्टेनेबल एग्रीकल्चर मॉडल (सीएमएसए) के अंतर्गत वर्तमान में 54 हजार 742 हितग्राहियों के साथ 25 हजार 580 एकड़ भूमि में कृषि मॉडल विकसित किया जा रहा है। इस मॉडल के तहत प्रत्येक हितग्राही की एक एकड़ अथवा 0.5 एकड़ भूमि का उपयोग किया जाता है। इसमें से 0.5 एकड़ अथवा 0.25 एकड़ में एसआरआई/सोयाबीन/खरीफ फसल ली जाती है। शेष 0.5 एकड़ में 7 सतह वेजीटेबल/फल उत्पादन लिया जाता है और रबी सीजन में गेहूँ, चना और सरसों की फसल ली जाती है। इस मॉडल से कृषि उत्पादन पर व्यय न्यूनतम होता है। मजदूरी हितग्राही द्वारा की जाती है और किसान एक एकड़ भूमि से एक लाख रुपये की आय प्राप्त कर सकता है। आजीविका फ्रेश योजना में स्व-सहायता समूह द्वारा उत्पादित सब्जियाँ एवं अन्य उत्पादन के विक्रय की व्यवस्था की जाती है। इस समय प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में 429 आजीविका फ्रेश संचालित की जा रही हैं। एसआरआई कार्यक्रम में एक लाख 35 हजार 276 हितग्राहियों द्वारा 51 हजार 381 एकड़ भूमि में धान का उत्पादन किया जा रहा है। इस पद्धति की सहायता से किसान पारम्परिक तरीके से पैदा की जाने वाली फसल की तुलना में 2 से 3 गुना अधिक फसल प्राप्त कर रहे हैं। मिशन के प्रारंभ से पूर्व एनआरएलपी जिलों में मिशन से जुड़े किसानों द्वारा वर्ष 2012 में 196 एकड़ भूमि में एसआरआई पद्धति से धान का उत्पादन किया जाता था, जो अब बढ़कर 51 हजार 381 एकड़ हो गया है।

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मिशन के अंतर्गत सिस्टम ऑफ मेज इन्टेन्सिफिकेशन (एसएमआई) में 2,163 हितग्राहियों द्वारा 73 एकड़ भूमि में नई तकनीक से सरसों का उत्पादन प्रारंभ कराया गया है। सिस्टम ऑफ व्हीट इन्टेन्सिफिकेशन (एसडब्ल्यूआई) में वर्ष 2014 से गेहूँ का उत्पादन 15 हजार 389 हितग्राहियों द्वारा किया जा रहा है। इस पद्धति से किसान 2 से 3 गुना तक अधिक फसल का उत्पादन ले रहे हैं। मिशन से जुड़े किसानों द्वारा वर्ष 2012 में 63 एकड़ भूमि में एसडब्ल्यूआई पद्धति से गेहूँ का उत्पादन कराया गया जो अब बढ़कर 771 एकड़ भूमि हो गया है।

कृषि आधारित आजीविका मिशन के अंतर्गत सब्जी उत्पादन कार्यक्रम में किसानों को व्यावसायिक सब्जी उत्पादन के लिए प्रेरित किया गया है। वर्तमान में लगभग 3 लाख 91 हजार 814 किसानों को व्यावसायिक सब्जी उत्पादन के साथ जोड़ा गया है। आज की स्थिति में मिशन के अंतर्गत चयनित जिलों में किसानों द्वारा एक लाख 71 हजार 213 एकड़ भूमि में व्यावसायिक सब्जी उत्पादन किया जा रहा है। इससे किसानों की आमदनी में 3 हजार से लेकर 15 हजार रुपये प्रति माह तक की वृद्धि हुई है। हल्दी उत्पादन के तहत मिशन में 9,242 हितग्राहियों के साथ 4,389 एकड़ भूमि में हल्दी उत्पादन कराया जा रहा है। किसानों को हल्दी का उचित मूल्य दिलाने के लिये बड़वानी और सागर जिले में प्रोसेसिंग संयंत्र लगाकर हल्दी पावडर का विक्रय किया जा रहा है। अनार उत्पादन कार्यक्रम के तहत मिशन के विभिन्न जिलों में अनार प्लांटेशन कराया जा रहा है। करीब 3,405 किसान 710 एकड़ भूमि में अनार उत्पादन कर रहे हैं। इससे इन किसानों की आमदनी में 3 वर्ष के बाद प्रति एकड़ उत्साहजनक वृद्धि होगी। मिशन के अंतर्गत चयनित जिलों में 19 हजार 442 हितग्राहियों द्वारा आलू उत्पादन किया जा रहा है। वर्ष 2012 में मिशन से जुड़े किसानों द्वारा केवल 376.25 एकड़ भूमि में आलू का उत्पादन किया जाता था और अब 1,505 एकड़ भूमि में आलू का उत्पादन किया जा रहा है। आलू उत्पादन संकुलों में नई कृषि तकनीक का उपयोग करने से डेढ़ से दो गुना वृद्धि हुई है। कोल्ड-स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर आलू का वेल्यू एडीशन भविष्य के लिये सुनिश्चित किया जा रहा है। आलू उत्पादकों की एक प्रोड्यूसर कम्पनी बनाई गई है। इस संबंध में सिद्धि विनायक, पुणे से भी सहयोग लेकर बायबैक एवं मार्केटिंग लिंकेज सुनिश्चित किया जा रहा है।

वाडी (WADI) विकसित कार्यक्रम के अंतर्गत आदर्श ब्लॉक बड़वानी में राजपुर, श्योपुर में कराहल एवं डिण्डोरी में समनापुर और जिला धार, शहडोल, मण्डला, अनूपपुर, अलीराजपुर में 4,506 हितग्राहियों का चयन कर वाडी विकसित कर हितग्राहियों की आय 10 हजार रुपये प्रति माह तक बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 5 लाख 84 हजार 134 हितग्राहियों द्वारा वर्मी पिट/नाडेप बनाए गये हैं। इसमें एक फीट से 2.5 से 2.7 टन जैविक खाद निकलती है, जो एक हेक्टेयर खेती के लिए पर्याप्त होती है। इससे हितग्राही जैविक खाद का अधिक से अधिक उपयोग करने की ओर अग्रसर हो रहे हैं, जैविक खेती को बढ़ावा मिलना सुनिश्चित है। मिशन के अंतर्गत आगामी वर्षों में प्रमाणिक जैविक खेती कराने की योजना है।

कृषि आधारित आजीविका मिशन के अंतर्गत महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना का 3 संस्थाओं आसा, प्रदान और कार्ड द्वारा क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत 35 हजार 116 ग्रामीण महिला किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है। परियोजना के क्षेत्र में 28 उत्पादक कम्पनियों का गठन किया गया है। इसमें 20 कृषि आधारित, 4 दुग्ध और 4 मुर्गी-पालन की कम्पनियाँ हैं। इन उत्पादक कम्पनियों से ग्रामीण अंचलों के 43 हजार 499 हितग्राही जुड़े हैं। ग्रामीण अंचलों में 7 लाख 72 हजार 635 आजीविका पोषण वाटिका (Ketchan Garden) तैयार की गई हैं।

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