आलू उत्पादन के लिए निम्न लागत निवेश प्रौधोगिकी

0
518
views

आलू उत्पादन के लिए निम्न लागत निवेश प्रौधोगिकी

आलू सर्वाधिक निवेश गहन फसलों में से एक फसल है | निवेश तथा खेती संबंधी प्रक्रियाओं को अपनाने के बाद लाभप्रद स्तर पर लागत का करीब 35 – 40% बीजों के लिए, लगभग 40% कृषि मजदूरी के लिए , 14% उर्वरकों तथा खाद तथा 7% सिंचाई के लिए है | इसलिए केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान , शिमला ने निम्न लागत की निवेश प्रौधोगिकी विकसित की है | इसके अपनाने से श्रम, बीज, जुताई, उर्वरक तथा सिंचाई निवेशों पर बचत हो सकती है |

जुताई

  • न्यूनतम जुताई का प्रयोग करें | खरीफ के मौसम के दौरान हरी खाद का उपयोग करें और उसके बाद एक बार पता करें | उसके बाद आलू बोने के लिए भूमि को तैयार करने हेतु एक बार बड़े ढेलों को तोड़ लें | दूसरी बार भूमि को तैयार करने की लागत में बचत करने के लिए पौधे लगाने के समय ही मेड बनाएं |
  • भूमि को तैयार करने में बचत आलू के बाद गेंहू लगाने से भी हो सकती है क्योंकि आलू की फसल काटने के समय जुटी हुई भूमि अत्यधिक विकसित हो जाती है | पेग टाइप इंटरकल्टीवेटर तथा रोटरी पेग टाइप इंटरकल्टीवेटर, रोटेटिंग ब्लेड टाइप इंटरकल्टीवेटर और कप टाइप पोटेटो प्लांट जैसे सी.पी.आर.आई. द्वारा विकसित किए गये कम कीमत के उपकरणों का प्रयोग करें |
यह भी पढ़ें   पलाश और बेर वृक्षों से संयुक्त लाख उत्पादन प्राप्त करने के लिए उन्नत तकनीकी

बीज                                              

  • करीब 50% तक बीज की आवश्यकता को कम करने के लिए पौधे लगाने संबंधी प्रणाली में समायोजन के साथ छोटे आकार के बीजों का प्रयोग करें | पौधे में अंतराल बढ़ाकर बड़े आकार के कंद भी प्रभावी ढंग से लगाए जा सकते है |
  • उर्वरक निम्न मात्र में उर्वरक की आवश्यकता वाली उच्च पैदावार देने वाली किस्मों को लगाएं | पोषक सक्षम किस्मों का प्रयोग करने के अलावा पोषक के श्रोत तथा अनुप्रयोग के तरीके का विवेकपूर्ण ढंग से चयन करें |
  • पौधे लगाने के दिन पहले यूरिया का प्रयोग करने से हानिकारक प्रभाव समाप्त हो जाता है | इसकी क्षमता बढ़ाने तथा खुराक को कम करने के लिए पौधे लगाने के समय फास्फोरस (पी) की अनुशंसित खुराक की आधी खुराक का प्रयोग करें तथा अन्य आधी खुराक का प्रयोग पर्णीय छिडकाव के माध्यम से करें | उपयुक्त कवकनाशी के साथ 1.5 % सिंगल सुपर फास्फेट + 0.50% यूरिया के घोल में 4 घंटे तक बीज कन्दों को भिगोने से फास्फोरस खाद की पर्याप्त बचत हासिल की जा सकती है |
  • आलू के बाद गेंहूँ में अनुशंसित नाइट्रोजन की केवल आधी मात्रा का प्रयोग तथा फास्फोरस एवं पोटाश का प्रयोग न करें क्योंकि उनकी आवश्यकता आलू की फसल से बचे अवशिष्टों से पूरी हो जाती है |
यह भी पढ़ें   अप्रैल (चैत्र-वैशाख) माह में किये जाने वाले खेती-बड़ी के काम 

जल प्रबंधन

  • सिंचाई का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करें | मध्यम संरचना वाली मिट्टियों में 25 मि.मी. से कब नमी वाली क्रांतिक मिटटी के समय सिंचाई करें जिससे 100 मि.मी. तक जल की अपेक्षा कम हो जाती है | वैकल्पिक हल्की सिंचाई को अपनाएं जिससे 25 – 35% जल की बहत की जा सकती है परन्तु पैदावार में 10% कमी भी हो सकती है |
  • यदि श्रमिक आसानी से उपलब्ध और सस्ते हैं तो पैदावार का प्रकोप करें जिससे 1 – 2 सिंचाईयों की बचत हो सकती है |

खरपतवार प्रबंधन

अधिकांश खेती संबंधी प्रक्रियाएं एक दुसरे की पूरक हैं| खरपतवार नियंत्रण एसी एक प्रक्रिया है जिसे कई दुसरे खेती संबंधी प्रक्रियाओं से लाभ होता है मिटटी जनित रोगजनकों के नियंत्रण हेतु अनुशंसित , गर्म मौसम की खेती अपनाने से भी खरपतवारों की समस्या कम होती है | इसी प्रकार , जल किफायत हेतु पलवार से खरपतवारों में कमी आती है |

नाशीजीव एवं रोग प्रबंधन

पछेता झुलसा गंगा के उत्तरी मैदानों में फसल को प्रभावित करने वाला सर्वाधिक गंभीर रोग है | उच्च पैदावार देने वाली प्रतिरोधक किस्मों को अपनाए | नाशीजीव एवं रोगों की समस्या को कम करने के लिए उपयुक्त फसल चक्र को अपनाने के साथ – साथ स्वस्थ्य बीज का प्रयोग करें तथा गर्म मौसम की खेती अपनाएं |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here