अधिक लाभ के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली को अपनाएं किसान

2538
प्रतीकात्मक चित्र

एकीकृत कृषि प्रणाली:- देश में जहाँ चावल – गेंहू फसल प्रणाली को मूख्यताया अपनाया जाता है, भरपूर उत्पादकता प्राप्ति हेतु उन्नतशील अधिक उपज देने वाली विभिन्न प्रजातियों के चयन एवं सघन कृषि पद्धतियों के उपयोग के फलस्वरूप भूमिगत जल – स्तर में लगातार गिरावट हुई है | प्रदेश के मध्यभाग के 63% ट्यूबवेल का जल स्तर तीव्रगति से गिर गया है | ईएसआई के साथ – साथ उत्तरी भाग जो पहाड़ों के तराई का है, उसमें भी 9 प्रतिशत ट्यूबवेलों का जल स्तर अत्यधिक नीचे चला गया है |

इसके विपरीत उन क्षेत्रों के ट्यूबवेलों में जों नहरों के पास है, मृदाजल – स्तर में वृधि देखि गयी है जिसका प्रतिशत मात्र 28 है | मृदा जलस्तर में लागातार उत्तार चढ़ाव, पोषक तत्वों की कमी, खरपतवारों, रोग एवं अन्य के बुरे प्रभाव के फलस्वरूप आशानुरूप उपज प्राप्त करने हेतु सम्पूर्ण खर्च में 3 – 4% तक वृधि करना पड़ रहा है | ऐसी दशा में उत्पादकता में निरंतर वृधि बनाये रखना एक कठिन चुनौती है | मुख्य फसल प्रणाली की साथ – साथ अन्य कृषि आधारित उधोग अपनाने से भरपूर उपज के साथ से अधिक लाभकारी भी होता है | एसी पद्धति अपनाने से प्रक्षेत्र की उपलब्धियाँ निम्नलिखित है |

डाउनलोड किसान समाधान एंड्राइड एप्प 

  • मछली, मुर्गी एवं सुअर पालन करने से कुल रु. 79.064 / हे. प्राप्त हुआ जो चावल – गेंहू द्वारा प्राप्त धनराशि रु. 53.221 / हे. से 48.6% अधिक थी | इसके अतिरिक्त 500 दिनों का रोजगार भी मिला |
  • चावल – गेंहू फसल चक्र + मुर्गी पालन + डेयरी + सुअर + मच्छली + पापलर पेड़ द्वारा सर्वाधिक आय रु. 73.973/हे./वर्ष प्राप्त हुई जो की चावल – गेंहू प्रणाली से प्राप्त आय से 39 प्रतिशत अधिक है | इसके अतिरिक्त 483 दिन / हे./ वर्ष रोजगार भी प्राप्त हुआ |
  • चावल – गेंहू की अकेली खेती से जंहा प्रतिदिन रु. 190 मात्र प्राप्त हुआ वहीँ दूसरी ओर एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने से रु. 203 प्रतिदिन प्राप्त किया गया |
  • एकीकृत खेती से प्राप्त आय द्वारा उक्त किसानों ने 6 वर्ष में 07 हे. अतिरिक्त जमीन खरीद ली |
  • जल उत्पादकता की दृष्टि से चावल – गेंहू फसल प्रणाली र. 2.6 प्रति घनमीटर जबकि मछली + सुअर पालन से रु. 5.67 प्रति घनमीटर प्राप्त हुआ |
  • उक्त कृषकों ने अपने दुग्धशाला के पशुओं को चीनी मिलों से प्राप्त प्रेसमड को खिलाया, फलत: उत्पादकता एवं लाभ में वृधि हुई |
  • उक्त कृषकों ने सस्ते दर (रु. 2.39 प्रति किलो) से मछली आहार बनाने के अवयवों को खरीद कर रु. 6.50 प्रति किलो की दर से बेच कर लगभग 63 % लागत में कमी किया |
  • इस फसल – प्रणाली से प्राप्त आय – व्यय के आकड़ों से यह पता चला की देश के एसे क्षेत्रों में जहाँ उथले जल – स्तर एवं जल – मग्नता आदि की समस्या है, खाद्यान्न फसलों के साथ – साथ पशु, मुर्गी, मछली, सुअर तथा वानिकी वृक्षों की एकीकृत खेती अधिक लाभकारी होगी |
यह भी पढ़ें   किसान इस तरह बनाएं गोमूत्र से कीटनाशक दवा
पिछला लेखफसल चक्र अपनाने का महत्व एवं उससे होने वाले लाभ
अगला लेखऋण मोचन योजना के लिए किसानों के लिए जाने क्या है पात्रता

LEAVE A REPLY

अपना कमेंट लिखें
आपका नाम लिखें.